गुरुग्राम लैंड स्कैम में रॉबर्ट वाड्रा समेत 9 आरोपियों को समन, पूर्व CM हुड्‌डा सहित सभी आरोपियों को 16 मई को पेश होने का आदेश

गुरुग्राम लैंड स्कैम केस में रॉबर्ट वाड्रा समेत 9 आरोपियों को कोर्ट ने समन जारी किया है। सभी को 16 मई को पेश होने का आदेश दिया गया है।

गुरुग्राम लैंड स्कैम में रॉबर्ट वाड्रा समेत 9 आरोपियों को समन, पूर्व CM हुड्‌डा सहित सभी आरोपियों को 16 मई को पेश होने का आदेश

गुरुग्राम लैंड स्कैम में रॉबर्ट वाड्रा समेत 9 आरोपियों को समन
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 16 मई को पेश होने का दिया आदेश
मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट पर संज्ञान


हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिकोहपुर लैंड स्कैम मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा समेत कुल 9 आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया है।

विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 16 मई को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।

इस मामले की जड़ें साल 2008 की जमीन डील से जुड़ी हैं। उस समय रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 3.5 एकड़ जमीन करीब 7.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी।

उसी वर्ष, उस समय के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार ने इस जमीन पर व्यावसायिक कॉलोनी विकसित करने का लाइसेंस जारी किया। इसके कुछ ही समय बाद यह जमीन DLF को लगभग 58 करोड़ रुपए में बेच दी गई, जिससे करीब 50 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ।

साल 2012 में तत्कालीन IAS अधिकारी अशोक खेमका ने इस सौदे में अनियमितताओं का हवाला देते हुए जमीन के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था। उन्होंने लाइसेंस प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था।

इसके बाद 2018 में हरियाणा पुलिस ने रॉबर्ट वाड्रा, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, DLF और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोपों में FIR दर्ज की थी।

ED ने इसी FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की। एजेंसी को संदेह है कि इस सौदे में जमीन की कीमत असामान्य रूप से बढ़ाई गई और इसमें फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ महीनों में जमीन की कीमत में भारी उछाल आया और इस पूरे लेन-देन से बड़े स्तर पर वित्तीय लाभ हुआ। इसके अलावा, DLF को अन्य जमीन आवंटन में भी कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपए का फायदा होने की बात जांच के दायरे में है।

बताया जा रहा है कि ED पहले भी रॉबर्ट वाड्रा से कई बार पूछताछ कर चुकी है। वर्ष 2025 में उन्हें तीन बार बुलाकर कई घंटों तक पूछताछ की गई थी और उनके बयान दर्ज किए गए थे।

वहीं, रॉबर्ट वाड्रा ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक मंशा से प्रेरित बताया था। उन्होंने कहा था कि वे लगातार जांच एजेंसियों के सवालों का जवाब देते रहे हैं और आगे भी सहयोग करते रहेंगे।