बडी खबर : सोनीपत में पेपरलेस सिस्टम की पहली फर्जी रजिस्ट्री उजागर, कई आएंगे लपेटे में 

गन्नौर तहसील में पेपरलेस सिस्टम की पहली फर्जी रजिस्ट्री सामने आई। एडीसी की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनी। नायब तहसीलदार की शक्तियां छीने जाने की संस्तुति।

बडी खबर : सोनीपत में पेपरलेस सिस्टम की पहली फर्जी रजिस्ट्री उजागर, कई आएंगे लपेटे में 


 
➤एडीसी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित, 15 दिन में रिपोर्ट
➤आरोपित नायब तहसीलदार की रजिस्ट्रेशन पावर छीने जाने की संस्तुति

 
सोनीपत जिले की गन्नौर तहसील में पेपरलेस सिस्टम में फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। इसे बड़ा फर्जीवाड़ा माना जा रहा है। गंभीरता देखते हुए  रविवार को अवकाश के दिन जिला उपायुक्त सुशील सारवान ने राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कैंप ऑफिस बुलाकर पूरे मामले की समीक्षा की। बैठक के बाद डीसी जांच के आदेश जारी किए है

डीसी ने फर्जी रजिस्ट्री मामले की जांच के लिए एडीसी लक्षित सरीन की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं। कमेटी को 15 दिन के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी होगी। एडीसी को आवश्यकता अनुसार अन्य अधिकारियों को कमेटी में शामिल करने का अधिकार दिया गया है।

इस मामले में फर्जी विक्रेता, फर्जी खरीदार, गवाह, नंबरदार और डीड राइटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही, आरोपित नायब तहसीलदार अमित कुमार की रजिस्ट्रेशन शक्तियां छीनने की संस्तुति राजस्व विभाग की वित्तायुक्त सुमिता मिश्रा को भेजी गई है।

डीसी ने बताया कि फर्जी रजिस्ट्री को रद कराने के लिए सिविल कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा। नए पेपरलेस सिस्टम के तहत रजिस्ट्री को न तो मैन्युअल तरीके से और न ही वेब हैलरिस पोर्टल पर रद किया जा सकता है। ऐसे में कोर्ट के आदेश के बाद ही रजिस्ट्री रद होगी।

मामले की शुरुआत दिल्ली के शालीमार बाग निवासी बिकास पाड़िया की शिकायत से हुई। उन्होंने 12 जनवरी को गन्नौर के एसीपी को दी शिकायत में बताया कि उनकी फर्म सपाज एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड की गन्नौर बाय रोड पर वर्ष 2011 से कुल 36 कनाल जमीन दर्ज है। 10 जनवरी को उन्हें जानकारी मिली कि उनकी जमीन की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री कर दी गई है।

जांच में सामने आया कि नसीरपुर बांगर निवासी प्रमोद कुमार ने फर्म का फर्जी अथारिटी लेटर तैयार कर खुद को जमीन का मालिक बताया और जमीन को जींद के पिल्लूखेड़ा निवासी बलबीर सिंह को करीब 6.16 करोड़ रुपये में बेच दिया। 27 नवंबर को रजिस्ट्री के दौरान गोहाना के गांव बरोदा निवासी प्रवीन कुमार को गवाह और गांव बाय निवासी रविंद्र को नंबरदार दर्शाया गया।

शिकायतकर्ता ने फर्जी विक्रेता, खरीदार, गवाहों और डीड राइटर विनय कुमार के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की थी। 13 जनवरी को रजिस्ट्री करने वाले नायब तहसीलदार अमित कुमार ने भी पुलिस को फर्जी विक्रेता के खिलाफ केस दर्ज करने का पत्र लिखा था, लेकिन प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी।

इधर, राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने भी इस फर्जी रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और कार्यालय खुलते ही अलग से जांच कमेटी गठित कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए गए किसी भी अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि अमित कुमार पर पहले भी आरोप लग चुके हैं। वर्ष 2024 में गुरुग्राम की कादीपुर तहसील में नायब तहसीलदार रहते हुए रजिस्ट्रियों में घोटालों को लेकर जांच की संस्तुति हुई थी। उस समय न तो आपराधिक केस दर्ज हुआ और न ही प्रभावी कार्रवाई हुई। करीब 10 महीने निलंबन के बाद उन्हें बहाल कर दिया गया था। अब गन्नौर में एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है।

गन्नौर तहसील में रजिस्ट्रियों में अनियमितताओं का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2023 में तत्कालीन नायब तहसीलदार शिवराज ने अवैध कॉलोनियों में 63 रजिस्ट्रियां नगर पालिका की एनओसी और प्रॉपर्टी टैक्स के बिना कर दी थीं। इससे नगर पालिका को भारी राजस्व नुकसान हुआ था। जांच के बाद उन्हें निलंबित किया गया था।