हरियाणवी बहू बनीं जेवलिन स्टार अनु रानी, रोहतक के किक बॉक्सर साहिल संग सात फेरे

जेवलिन थ्रोअर अनु रानी और रोहतक के किक बॉक्सर साहिल भारद्वाज ने मेरठ में सात फेरे लिए। वरमाला में नोट उड़ाए गए। आज रात रोहतक में रिसेप्शन होगा।

हरियाणवी बहू बनीं जेवलिन स्टार अनु रानी, रोहतक के किक बॉक्सर साहिल संग सात फेरे
  • रोहतक के किक बॉक्सर साहिल भारद्वाज और इंटरनेशनल जेवलिन थ्रोअर अनु रानी ने मेरठ में सात फेरे लिए

  • वरमाला के दौरान साहिल ने 10-10 के नोटों की दो गड्डियां हवा में उड़ाईं

  • आज रात रोहतक में होगा भव्य रिसेप्शन, दोनों परिवारों में खुशी का माहौल



रोहतक के रहने वाले किक बॉक्सर साहिल भारद्वाज और मेरठ की इंटरनेशनल जेवलिन थ्रोअर अनु रानी शादी के बंधन में बंध गए। मेरठ के एक मैरिज पैलेस में दोनों ने सात फेरे लिए। स्टेज पर साहिल ने अनु रानी को वरमाला पहनाई और इस दौरान उन्होंने 10-10 के नोटों की दो गड्डियां हवा में उड़ाकर खुशी का इजहार किया।

साहिल ने अनु रानी का हाथ पकड़कर स्टेज पर चढ़ाया। इस दौरान अनु ने साहिल को फूलों का एक गुलदस्ता दिया।

साहिल रविवार को रोहतक से बारात लेकर मेरठ पहुंचे। वह मर्सिडीज कार में पहुंचे और गेस्ट हाउस पहुंचकर बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। आज रात इनका रिसेप्शन रोहतक में रखा गया है, जहां खिलाड़ियों और समाजसेवियों की बड़ी मौजूदगी रहने की उम्मीद है।

वरमाला डालने के बाद साहिल ने नोटों की गडि्डयों को हवा में उड़ा दिया।

साहिल मूल रूप से रोहतक के सांपला के रहने वाले हैं और वर्तमान में जनता कॉलोनी में रहते हैं। वह चार बार के नेशनल किक बॉक्सिंग चैंपियन हैं और 2025 में छत्तीसगढ़ में हुई नेशनल चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं।

अनु रानी के साथ उनकी सहेलियों ने ग्रुप में फोटो खिंचवाई। साथ ही उन्हें शादी की बधाई दी।

दूल्हा-दुल्हन की शादी की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि साहिल ने अनु का हाथ पकड़कर उन्हें स्टेज पर चढ़ाया। उनकी सहेलियों ने अनु के साथ ग्रुप में फोटो खिंचवाकर उन्हें बधाई दी। वरमाला के बाद साहिल ने नोटों की गड्डियां हवा में उड़ाईं और दोनों परिवारों ने मिलकर जश्न मनाया।

दूल्हा बने साहिल अपने दोस्तों के साथ स्टेज पहुंचे।

साहिल के परिवार का अमेरिका में बिजनेस है, जहां उनका वेयरहाउस और गैस स्टेशन हैं। फिलहाल यह काम उनके भाई संभाल रहे हैं। साहिल के पिता रवि केंद्र सरकार के EPFO विभाग में कर्मचारी हैं और उनकी मां मुकेश देवी गृहिणी हैं।

अनु रानी की कहानी प्रेरणादायक रही है। मेरठ के बहादुरपुर में किसान परिवार में जन्मी अनु ने बचपन में खेतों में गन्ने से भाला बनाकर फेंकना शुरू किया। भाई उपेंद्र ने उनमें प्रतिभा पहचानी और खेल में जाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में लोगों ने विरोध किया और पिता भी राजी नहीं थे, लेकिन अनु ने चोरी-छिपे अभ्यास जारी रखा और आखिरकार परिवार को मना लिया।

2014 में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर उन्होंने अपने करियर की धमाकेदार शुरुआत की। 2019 में वह वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज जीता।

2023 में उन्होंने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। वह दुनिया की शीर्ष जेवलिन थ्रो खिलाड़ियों में शामिल हो चुकी हैं। हालांकि 2024 पेरिस ओलिंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई नहीं कर सकीं, लेकिन रैंकिंग कोटा के जरिए उन्हें जगह मिली।