हरियाणा राज्यसभा चुनाव: 1 वोट की कीमत और कांग्रेस की 'सांसें रोक देने वाली' जीत
हरियाणा राज्यसभा चुनाव में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत हासिल की है। कांग्रेस के 5 विधायकों की क्रॉस वोटिंग और 4 वोट रद्द होने के बावजूद कर्मवीर बौद्ध महज 0.66 वोट वैल्यू के अंतर से सतीश नांदल को हराने में कामयाब रहे।
■ महज 0.66 वोट वैल्यू के अंतर से सतीश नांदल की हार और कर्मवीर बौद्ध की किस्मत
■ भाजपा का 1 वोट रद्द होना और इनेलो की तटस्थता ने कांग्रेस को दिया जीवनदान
■ कांग्रेस के वो 'गुप्त' 5 बागी कौन? जिन्होंने ऐन वक्त पर बदल दिया पाला
हरियाणा की राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि यहाँ की आबोहवा में ही सियासी रोमांच घुला हुआ है, लेकिन राज्यसभा चुनाव के ताजा परिणामों ने 'कांटे की टक्कर' शब्द को नई परिभाषा दे दी है। इस चुनाव में एक वोट की कीमत क्या होती है, यह उन सतीश नांदल से पूछिए जो जीत की दहलीज पर खड़े होकर भी महज 0.66 वोट वैल्यू के फेर में राज्यसभा की कुर्सी से दूर रह गए। भाजपा के संजय भाटिया तो आसानी से 27.66 वोटों के साथ सदन पहुँच गए, लेकिन दूसरी सीट का फैसला आंकड़ों की ऐसी बाजीगरी पर टिका था, जहाँ एक-एक वोट सोने से भी कीमती साबित हुआ। कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने 28 वोट पाकर जीत तो दर्ज की, लेकिन इस जीत के पीछे भाजपा की एक तकनीकी चूक और इनेलो का चुनावी मैदान से हट जाना सबसे बड़ा 'एक्स-फैक्टर' रहा।
पर्दे के पीछे की कहानी देखें तो इस चुनाव में भाग्य ने कांग्रेस का साथ तब दिया जब भाजपा का एक महत्वपूर्ण वोट रद्द हो गया। यदि भाजपा का वह एक विधायक सही तरीके से मतदान करता, तो निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल के पास कांग्रेस से अधिक वोट होते और नतीजा पूरी तरह पलट जाता। इतना ही नहीं, इनेलो के 2 विधायकों का वोट न डालना भी कांग्रेस के लिए वरदान साबित हुआ। विस्तृत आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस के 37 विधायकों में से 5 ने पाला बदलकर क्रॉस वोटिंग की और 4 वोट रद्द हो गए, जिससे पार्टी के पास सिर्फ 28 वोट बचे। एक समय ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस यह सीट हार जाएगी, लेकिन एक रद्द वोट और दशमलव की गणित ने कांग्रेस की साख बचा ली। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जहाँ इसे कांग्रेस की नैतिक हार बताया, वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसे अपनी रणनीतिक जीत करार दिया। अब इस चुनाव के बाद हरियाणा में राज्यसभा की स्थिति भाजपा के पक्ष में 4-1 की हो गई है, लेकिन कांग्रेस की यह 'एक वोट वाली जीत' लंबे समय तक चर्चा का केंद्र बनी रहेगी। वहीं जीत के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसे अग्निपरीक्षा बताया, लेकिन 5
विधायकों की बगावत ने हाईकमान के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के 25 प्रतिशत विधायक 'ट्रांसफर' हो गए हैं, जो आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है।
Akhil Mahajan