बिना ऑक्सीजन 24 घंटे! रोहताश खिलेरी ने माउंट एल्ब्रुस पर रचा इतिहास, - 50 डिग्री में भी नहीं टूटा हौंसला,हिसार पहुंचने पर जोरदार स्वागत
हिसार पहुंचने पर रोहताश खिलेरी का जोरदार स्वागत हुआ। माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन 24 घंटे बिताकर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बनाकर देश का नाम रोशन किया।
- हिसार पहुंचने पर रोहताश खिलेरी का जोरदार स्वागत
- माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन 24 घंटे बिताकर रचा इतिहास
- .माइनस 50 डिग्री तापमान में दिखाया अदम्य साहस
हिसार पहुंचते ही यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर ऐतिहासिक कारनामा करने वाले पर्वतारोही रोहताश खिलेरी का भव्य और जोरदार स्वागत किया गया। गांव और शहर में ढोल-नगाड़ों के साथ लोगों ने उनका अभिनंदन किया। इस उपलब्धि से पूरे हरियाणा और देश में गर्व का माहौल है।
पर्वतारोही रोहताश खिलेरी की ऐतिहासिक उपलब्धि ने पूरे देश को गर्व से भर दिया है। रोहताश ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन के लगातार 24 घंटे बिताकर नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। 18,510 फीट ऊंची इस चोटी पर ऐसा करने वाले वह दुनिया के पहले व्यक्ति बन गए हैं।
माउंट एल्ब्रुस पर 24 घंटे बिताने के दौरान रोहताश को माइनस 40 से माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बर्फीली हवाओं का सामना करना पड़ा। इन हालातों को मौत जैसी परिस्थितियां माना जाता है, लेकिन रोहताश का हौसला जरा भी नहीं टूटा। उन्होंने अकेले ही इस चुनौती को पूरा कर दिखाया।
रोहताश खिलेरी बीते आठ वर्षों से लगातार पर्वतारोहण का अभ्यास कर रहे हैं। वह रोजाना दो घंटे कठिन ट्रेनिंग, स्पेशल एक्सरसाइज और मेडिटेशन करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों से वह माउंट एल्ब्रुस पर 24 घंटे रुकने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन हर बार तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें लौटना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया।
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद रोहताश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि एक समय ऐसा भी था जब जिंदगी बेहद भारी लगने लगी थी और हर तरफ अंधेरा नजर आता था। हार मानने के विचार आते थे, लेकिन उन्होंने झुकने के बजाय खड़े होकर लड़ना चुना। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय देशवासियों की दुआओं और गुरु जम्भेश्वर भगवान के आशीर्वाद को दिया।
रोहताश ने माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर तिरंगा फहराकर इस उपलब्धि को देश को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि वहां की कंपा देने वाली ठंड यह याद दिलाती है कि मानव इच्छाशक्ति से बड़ा कुछ भी नहीं है। इससे पहले वर्ष 1999 में नेपाल के बाबू श्री शेरपा ने माउंट एवरेस्ट पर बिना ऑक्सीजन के 21 घंटे बिताने का रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन माउंट एल्ब्रुस पर 24 घंटे रुकने का यह रिकॉर्ड अपने आप में अनोखा है।
रोहताश की इस सफलता से उनके गांव और पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। उनके पिता सुभाष चंद्र किसान हैं और बेटे की इस उपलब्धि से उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। गांव में ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाइयां बांटी गईं और रोहताश के हिसार पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया।
रोहताश इससे पहले भी कई ऊंची चोटियों को फतह कर चुके हैं। 16 मई 2018 को माउंट एवरेस्ट, 23 जुलाई 2018 और 23 मार्च 2021 को माउंट किलिमंजारो, 4 सितंबर 2018 और 1 फरवरी 2020 को माउंट एल्ब्रुस, 9 अक्टूबर 2020 को माउंट फ्रेंडशिप और 1 नवंबर 2020 को माउंट मून पर उन्होंने सफलता हासिल की। वर्ष 2021 में माउंट किलिमंजारो पर 24 घंटे रुकने के रिकॉर्ड के आधार पर उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ।
Akhil Mahajan