गुरुवार विशेष: भगवान विष्णु की पूजा क्यों मानी जाती है सबसे फलदायी? जानिए व्रत, नियम और महत्व
गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। जानिए पूजा की विधि, शुभ नियम, व्रत की मान्यताएं और भगवान विष्णु का प्रिय मंत्र।
➤ गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है
➤ मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है
➤ पीले वस्त्र, केले का भोग और विष्णु मंत्र का जाप शुभ फलदायी माना जाता है
हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, धन, वैभव और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है। कई श्रद्धालु इस दिन गुरुवार का व्रत भी रखते हैं और भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं।
गुरुवार को क्यों होती है भगवान विष्णु की पूजा?
शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु जगत के पालनहार हैं। उनकी कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। बृहस्पति ग्रह को भी इस दिन का स्वामी माना जाता है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर होता है, वे भी गुरुवार का व्रत और पूजा करते हैं।
पूजा की सरल विधि
गुरुवार सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, हल्दी, चने की दाल, बेसन के लड्डू और केले का भोग अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
क्या करें और क्या न करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को पीली वस्तुओं का दान करना भी पुण्यदायी माना गया है।
वहीं कई परंपराओं में गुरुवार के दिन बाल, दाढ़ी या नाखून काटने तथा केले के पेड़ को नुकसान पहुंचाने से बचने की सलाह दी जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में इन मान्यताओं का पालन भिन्न हो सकता है।
Akhil Mahajan