बिना इंश्योरेंस अब नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, केंद्र बनाएगा पायलट प्रोजेक्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल न देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। नई व्यवस्था में तकनीक आधारित निगरानी भी शामिल होगी।
➤ सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाले वाहनों को ईंधन न देने के पायलट प्रोजेक्ट का दिया निर्देश
➤ केंद्र सरकार, IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय मिलकर तैयार करेंगे नई व्यवस्था
➤ देश में 30.48 करोड़ वाहनों में से 16.54 करोड़ बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के बिना चलने वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन न देने की व्यवस्था को लेकर एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जाए। इस योजना को विकसित करने की जिम्मेदारी भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को संयुक्त रूप से दी गई है।
ANPR कैमरों से होगी निगरानी
जस्टिस संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुझाव दिया कि इस व्यवस्था में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों का उपयोग किया जा सकता है। इससे बिना वैध बीमा वाले वाहनों की पहचान कर उन्हें ईंधन देने से रोका जा सकेगा।
56% वाहन बिना इंश्योरेंस के
सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए चिंता जताई कि देश में 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहन, यानी करीब 56 प्रतिशत, बिना वैध बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। अदालत ने कहा कि यह स्थिति सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए गंभीर समस्या पैदा करती है।
दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाना उद्देश्य
अदालत ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का उद्देश्य केवल कानून का पालन कराना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना में पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर मुआवजा दिलाना भी है। बिना बीमा वाले वाहनों के कारण पीड़ितों को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।
नई गाड़ियों के लिए बढ़ेगी बीमा अवधि
सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI को निर्देश दिया है कि नई चार पहिया निजी गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष और दोपहिया वाहनों के लिए चार वर्ष से बढ़ाकर छह वर्ष की जाए। इसके साथ ही वाहन मालिकों को ओन डैमेज, पर्सनल एक्सीडेंट कवर और अन्य ऐड-ऑन विकल्प भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मोबाइल ऐप और हैंडहेल्ड डिवाइस से होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को भी निर्देश दिया है कि ट्रैफिक पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल एप उपलब्ध कराए जाएं, जो VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के डेटाबेस से जुड़े हों। इससे मौके पर ही किसी भी वाहन की बीमा स्थिति की जांच कर कार्रवाई की जा सकेगी।
तकनीक से होगी सख्त निगरानी
अदालत ने कहा कि सड़क सुरक्षा कानूनों का प्रभावी पालन तभी संभव है, जब हर वाहन के पास वैध थर्ड-पार्टी बीमा हो। इसके लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करना आवश्यक है, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
Akhil Mahajan