लेह-लद्दाख में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए हरियाणा के सूबेदार हितेश सहरावत
लेह-लद्दाख में ड्यूटी के दौरान सूबेदार हितेश सहरावत शहीद हो गए। रविवार को पार्थिव शरीर गांव गहलब पहुंचा। हजारों लोगों ने राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
• लेह-लद्दाख में ड्यूटी के दौरान सूबेदार हितेश सहरावत शहीद
• पैतृक गांव गहलब में हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई
• राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, बेटे ने दी मुखाग्नि
पलवल जिले के हथीन उपमंडल के गांव गहलब का वीर सपूत सूबेदार हितेश सहरावत लेह-लद्दाख में ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से शहीद हो गए। शनिवार सुबह ड्यूटी के दौरान अचानक हृदयघात (हार्ट अटैक) आने पर उन्होंने देश सेवा करते हुए प्राण त्याग दिए। इस खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
रविवार सुबह शहीद का पार्थिव शरीर पैतृक गांव गहलब पहुंचा। जहां हजारों की भीड़ इकट्ठी हो गई। “शहीद हितेश सहरावत अमर रहें” और “भारत माता की जय” के नारों से पूरा गांव गूंज उठा। अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। शहीद के बेटे सौरव ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
शहीद को राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया और राष्ट्रीय ध्वज के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान माहौल अत्यंत भावुक हो गया।
सूबेदार हितेश सहरावत ने 15 फरवरी 2001 को आर्मी सप्लाई कोर रेजिमेंट में बतौर ड्राइवर भर्ती होकर सेवा आरंभ की थी। लंबे सैन्य कार्यकाल के बाद वे वर्तमान समय में सूबेदार के पद पर तैनात थे। शहीद हादसे से पहले रसद सामग्री लेकर लेह-लद्दाख में ड्यूटी क्षेत्र की ओर अग्रसर थे।
लेफ्टिनेंट कर्नल केजी शर्मा ने बताया कि लद्दाख में इन दिनों तापमान तेजी से गिर रहा था, लेकिन इसके बावजूद सूबेदार हितेश अपने कर्तव्य पर पूरी निष्ठा और साहस के साथ डटे रहे। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना उनकी बहादुरी और समर्पण को सदैव याद रखेगी।
अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, पूर्व सैनिक, सामाजिक संगठन, सेना के अधिकारी और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। सम्मान प्रकट करने पहुंचे प्रमुख लोगों में कर्नल केजी शर्मा, प्रीतम पोसवाल फौजी, विक्की पोसवाल फौजी, वरिष्ठ भाजपा नेता रविंद्र सहरावत, पूर्व विधायक प्रवीण डागर, समाजसेवी गजराज आर्य, एसएचओ जोगिंद्र सिंह, सीटीएम अप्रतिम सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
गांव में मातम छाया रहा और लोग नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देते रहे। अंत तक “भारत माता की जय” और “शहीद हितेश अमर रहें” के नारे लगातार गूंजते रहे।
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