सिर्फ 8-9 घंटे सोना काफी नहीं, नींद की क्वालिटी भी जरूरी; बार-बार टूट रही नींद तो हो जाएं सावधान
सिर्फ 7 से 9 घंटे सोना पर्याप्त नहीं, नींद की गुणवत्ता भी जरूरी है। बार-बार नींद टूटना, थकान और दिन में नींद खराब नींद के संकेत हो सकते हैं।
➤ 7 से 9 घंटे की नींद के साथ उसका गहरा और निर्बाध होना भी जरूरी
➤ सुबह थकान, दिन में नींद और चिड़चिड़ापन खराब नींद के संकेत हो सकते हैं
➤ लंबे समय तक खराब नींद वजन, ब्लड शुगर और हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है
अच्छी सेहत के लिए सिर्फ खान-पान और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि रात की नींद भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अक्सर यह माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति रोजाना करीब 8 घंटे सो रहा है तो उसकी नींद पूरी हो रही है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार केवल नींद की अवधि ही मायने नहीं रखती। नींद कितनी गहरी, आरामदायक और निर्बाध है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर पर्याप्त समय बिस्तर पर बिताने के बावजूद रात में बार-बार नींद टूटती है या सुबह उठने के बाद थकान महसूस होती है, तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा है।
नींद हमारे शरीर और दिमाग को आराम देने के साथ अगले दिन के लिए ऊर्जा जुटाने में भी अहम भूमिका निभाती है। जब नींद लगातार खराब रहती है तो इसका असर धीरे-धीरे रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगता है। दिनभर सुस्ती और थकान रहना, काम पर ध्यान लगाने में परेशानी, चिड़चिड़ापन, मूड में बदलाव और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां इसका हिस्सा हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव, देर रात तक मोबाइल चलाना और सोने-जागने का अनियमित समय नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सिर्फ बिस्तर पर ज्यादा समय बिताना पर्याप्त नहीं होता। अगर सोने का समय लंबा है, लेकिन नींद बार-बार टूटती है या बहुत हल्की रहती है तो शरीर को जरूरी आराम नहीं मिल पाता।
7 से 9 घंटे की नींद के साथ निरंतरता भी जरूरी
वयस्कों के लिए रात में आमतौर पर 7 से 9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है। हालांकि, इस अवधि के दौरान अगर बार-बार नींद टूटती रहती है या नींद बहुत हल्की रहती है तो शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता।
इस तरह की नींद की समस्या के कारण दिमाग को भी पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता और व्यक्ति अगले दिन थका हुआ महसूस कर सकता है। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए नींद की अवधि के साथ उसकी निरंतरता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
कैसे पहचानें कि नींद अच्छी नहीं रही
सुबह उठते ही थकान महसूस होना, दिन में बार-बार नींद आना, काम पर ध्यान लगाने में परेशानी, चिड़चिड़ापन और बार-बार जम्हाई आना इस बात के संकेत हो सकते हैं कि रात की नींद पर्याप्त आराम देने वाली नहीं रही।
अगर लगातार नींद खराब रहती है तो इसका असर मूड और मानसिक प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है। नींद की कमी भूख और ऊर्जा से जुड़े हार्मोन को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक इसका असर मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग जैसे स्वास्थ्य जोखिमों के रूप में देखा जा सकता है।
नींद बेहतर करने के लिए क्या करें
अच्छी और निर्बाध नींद के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में छोटे बदलाव मददगार हो सकते हैं। हर दिन लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करनी चाहिए। सोने से पहले तेज रोशनी और स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना भी जरूरी बताया गया है।
इसके अलावा देर रात भारी भोजन और कैफीन से बचने की सलाह दी गई है। इन आदतों को नियमित करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
अगर इन उपायों के बावजूद लगातार नींद से जुड़ी परेशानी बनी रहती है तो समय रहते डॉक्टर से सलाह लेने की बात कही गई है। लगातार खराब नींद को नजरअंदाज करने के बजाय उसके कारण पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि अच्छी नींद का संबंध रोजमर्रा की ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है।
Akhil Mahajan