2 दिन में नहीं मानी सरकार तो आंदोलन : अभय चौटाला

रोहतक मंडियों में गेहूं खरीद को लेकर विवाद गहराया, नेताओं ने बायोमेट्रिक सिस्टम और घोटालों पर सवाल उठाए, 2 दिन में फैसला नहीं बदला तो आंदोलन की चेतावनी।

2 दिन  में नहीं मानी सरकार तो आंदोलन : अभय चौटाला

बायोमेट्रिक और नियमों से किसान-व्यापारी दोनों परेशान का आरोप
सरकार पर कमीशन और घोटालों को लेकर गंभीर सवाल
2 दिन का अल्टीमेटम, नहीं मानी सरकार तो आंदोलन की चेतावनी


रोहतक की मंडियों में गेहूं खरीद को लेकर अब सियासी माहौल और गर्म हो गया है। एक तरफ जहां सरकार व्यवस्था सुधारने के दावे कर रही है, वहीं विपक्ष और किसान नेताओं ने खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मंडी दौरे के दौरान नेताओं ने आरोप लगाया कि बायोमेट्रिक सिस्टम और नए नियमों की वजह से किसान और व्यापारी दोनों ही परेशान हैं। उनका कहना है कि एक दिन में सीमित खरीद होने के कारण लंबी कतारें लग रही हैं और किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।INLD सुप्रीमो अभय चौटाला ने  सवाल उठाया कि गेहूं खरीद का जो केंद्र सरकार का सिस्टम है, उसमें राज्यों को पैसा मिलता है। ऐसे में उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादा खरीद के पीछे सरकार को मिलने वाला कमीशन भी एक वजह हो सकता है। उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ रुपए के इस सिस्टम में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

आरोप लगाया गया कि अगर किसानों को इसी तरह परेशान किया गया तो वे हरियाणा छोड़कर राजस्थान या पंजाब में अपनी फसल बेचने को मजबूर हो जाएंगे। इससे राज्य को नुकसान होगा और मंडी व्यवस्था भी प्रभावित होगी।

विपक्ष ने मांग की है कि बायोमेट्रिक सिस्टम खत्म किया जाए, राजस्थान की तर्ज पर किसानों को ₹100 मुआवजा दिया जाए और गाड़ियों के गेट पास सिस्टम को बंद किया जाए। उनका कहना है कि इन फैसलों से किसानों और व्यापारियों को राहत मिलेगी।

नेताओं ने सरकार पर कई घोटालों की जांच की भी मांग उठाई। उन्होंने शराब, रजिस्ट्री, सरसों, पेपर लीक और बैंकिंग से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन सभी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने में किसानों की बड़ी भूमिका रही है, लेकिन आज वही किसान परेशान हो रहा है। सरकार को किसानों को लाभ देने के बजाय उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए।

नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर 2 दिन के भीतर सरकार ने फैसले वापस नहीं लिए, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ी तो ट्रैक्टरों के साथ टकराव की स्थिति भी बन सकती है।

इसके साथ ही किसान संगठनों से एकजुट होने की अपील भी की गई। नेताओं ने कहा कि अलग-अलग लड़ने से नुकसान होगा, इसलिए सभी को मिलकर आवाज उठानी होगी।

व्यापारियों के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा कि लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई से भी भारी नुकसान हुआ है। मंडियों में काम करने वाले मजदूरों और छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों, मजदूरों और व्यापारियों के बीच आपसी भाईचारे को तोड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन अब लोग जागरूक हो रहे हैं और एकजुट होकर इसका जवाब देंगे।