ऑक्सीजन सिलेंडर से जिंदगी की नई उड़ान: स्टेज-4 कैंसर को मात देकर राहुल बने हजारों मरीजों की प्रेरणा

पानीपत के 32 वर्षीय राहुल ने स्टेज-4 फेफड़ों के कैंसर को मात देकर नई मिसाल कायम की। टार्गेटेड थेरेपी और समय पर इलाज से चार साल बाद भी स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

ऑक्सीजन सिलेंडर से जिंदगी की नई उड़ान: स्टेज-4 कैंसर को मात देकर राहुल बने हजारों मरीजों की प्रेरणा

➤ चार साल पहले स्टेज-4 फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे थे राहुल

➤ टार्गेटेड थेरेपी से खत्म हुई ऑक्सीजन की जरूरत

➤ डॉक्टर बोले- समय पर जांच और सही इलाज से कैंसर को हराना संभव

पानीपत | विश्व कैंसर सर्वाइवर डे विशेष

कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में डर और निराशा घर कर जाती है, लेकिन पानीपत के 32 वर्षीय राहुल की कहानी इस धारणा को बदलने वाली है। एक समय ऐसा था जब राहुल 24 घंटे ऑक्सीजन सिलेंडर पर निर्भर थे और उन्हें स्टेज-4 फेफड़ों के कैंसर का सामना करना पड़ रहा था। आज वही राहुल सामान्य जीवन जी रहे हैं और हजारों कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुके हैं।

करीब चार वर्ष पहले राहुल को लगातार सांस लेने में परेशानी होने लगी। शुरुआती जांचों के बाद डॉक्टरों ने उन्हें स्टेज-4 लंग कैंसर होने की जानकारी दी। बीमारी इतनी गंभीर हो चुकी थी कि राहुल को हर समय ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता पड़ती थी। परिवार और राहुल दोनों के लिए यह दौर बेहद कठिन और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण था। कई स्थानों पर उपचार की संभावनाएं सीमित बताई गईं, जिससे निराशा और बढ़ गई।

इसी दौरान राहुल ने उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल, पानीपत में उपचार शुरू कराया। अस्पताल की मेडिकल ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. श्वेता आर्या और उनकी टीम ने राहुल की विस्तृत जांच करवाई। बायोप्सी और मॉलिक्यूलर टेस्टिंग में पता चला कि राहुल ALK-पॉजिटिव लंग कैंसर से पीड़ित हैं। यह जानकारी इलाज की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।

डॉक्टरों ने राहुल का उपचार ओरल टार्गेटेड थेरेपी के जरिए शुरू किया। उपचार के परिणाम उम्मीद से कहीं अधिक सकारात्मक रहे। महज दो महीनों के भीतर राहुल की ऑक्सीजन पर निर्भरता समाप्त हो गई और धीरे-धीरे वे सामान्य जीवन की ओर लौटने लगे। आज उपचार शुरू होने के चार वर्ष बाद भी उनकी बीमारी पूरी तरह नियंत्रण में है और वे स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

डॉ. श्वेता आर्या के अनुसार राहुल की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि कैंसर का मतलब हमेशा हार नहीं होता। सही समय पर जांच, आधुनिक चिकित्सा तकनीक, उचित उपचार और मरीज के मजबूत हौसले का संयोजन कई बार चमत्कारिक परिणाम दे सकता है। उन्होंने बताया कि आज टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और पर्सनलाइज्ड मेडिसिन जैसी आधुनिक तकनीकों ने कैंसर मरीजों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

समय पर जांच से बढ़ती है जीत की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार समय पर जांच और शुरुआती पहचान है। कई मामलों में बीमारी शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती, जिसके कारण मरीज देर से उपचार तक पहुंचते हैं। नियमित स्क्रीनिंग और समय पर जांच से बीमारी का जल्द पता लगाया जा सकता है, जिससे उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

इसी जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 7 जून से 13 जून तक विशेष कैंसर स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और ओरल कैंसर की जांच मात्र 499 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है।

डॉक्टर का संदेश

विश्व कैंसर सर्वाइवर डे के अवसर पर डॉ. श्वेता आर्या ने कहा कि कैंसर को हराने वाले लोग केवल सर्वाइवर नहीं बल्कि समाज के लिए प्रेरणा हैं। उनका संघर्ष यह संदेश देता है कि उम्मीद, साहस और सही इलाज के साथ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को भी हराया जा सकता है।