BBMB विवाद: हिमाचल को बड़ी राहत, बिजली के रूप में मिलेगा 60 साल का बकाया; सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब से मांगा जवाब
BBMB विवाद में हिमाचल प्रदेश को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने नकद की बजाय बिजली के रूप में बकाया चुकाने का प्रस्ताव दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब से दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
➤ केंद्र ने नकद की जगह बिजली देकर बकाया चुकाने का रखा प्रस्ताव
➤ हिमाचल और हरियाणा प्रस्ताव से सहमत, पंजाब ने जताई आपत्ति
➤ सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के दिए निर्देश
नई दिल्ली/शिमला। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के हिस्से को लेकर करीब छह दशक से चल रहे विवाद में राज्य को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने एक कैशलेस सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत हिमाचल को उसके लंबे समय से लंबित बिजली बकाये का भुगतान नकद की बजाय बिजली (ऊर्जा) के रूप में किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर हिमाचल प्रदेश और हरियाणा ने सिद्धांततः सहमति जता दी है, जबकि पंजाब सरकार ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से दो सप्ताह के भीतर अपना स्पष्ट जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।
60 साल पुराने विवाद के समाधान की दिशा में अहम कदम
पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के बाद बीबीएमबी परियोजनाओं में हिस्सेदारी को लेकर राज्यों के बीच विवाद शुरू हुआ था। लंबे समय तक समाधान नहीं निकलने पर हिमाचल प्रदेश ने वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद 27 सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए हिमाचल का 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सा तय किया था।
हालांकि 2011 के बाद हिमाचल को उसका हिस्सा मिलने लगा, लेकिन 1966 से 2011 तक की अवधि का बकाया अब तक नहीं मिल पाया। यही बकाया अब इस नए प्रस्ताव के केंद्र में है।
13,066 मिलियन यूनिट बिजली के बराबर है बकाया
जानकारी के अनुसार हिमाचल का लंबित बकाया करीब 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के बराबर है। केंद्र सरकार ने सुझाव दिया है कि पंजाब और हरियाणा इस राशि का भुगतान नकद की बजाय बिजली के रूप में करें। प्रस्ताव के तहत 12,000 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली हिमाचल प्रदेश को उपलब्ध कराई जा सकती है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो हिमाचल को भविष्य में ऊर्जा उपलब्धता के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
420 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ
प्रस्ताव का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हिमाचल प्रदेश को बीबीएमबी परियोजनाओं की पूंजीगत लागत के रूप में पंजाब और हरियाणा को लगभग 420 करोड़ रुपये नहीं चुकाने होंगे। इस राशि को भी बिजली बकाये में समायोजित करने का प्रस्ताव है। इससे राज्य को दोहरा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
पंजाब ने क्यों जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निधेश गुप्ता ने कहा कि बकाये की गणना के लिए प्रस्तावित 2.50 रुपये प्रति यूनिट की दर अधिक है। यदि यही दर लागू होती है तो पंजाब पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने केंद्र के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा कि उसे न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए अपना स्पष्ट रुख निर्धारित समय में बताना चाहिए। अदालत ने पंजाब को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त तय की।
Akhil Mahajan