हरियाणा में जुलाई में 27% कम बारिश, 15 जिलों में सूखे जैसे हालात
हरियाणा में जुलाई के दौरान सामान्य से 27 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई। 15 जिले रेन डेफिसिट की चपेट में हैं, जबकि 3 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है।
हरियाणा में जुलाई में सामान्य से 27% कम बारिश दर्ज
15 जिलों में बारिश की भारी कमी से खरीफ फसलों पर संकट गहराया
1 अगस्त को पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में भारी बारिश का यलो अलर्ट
हरियाणा में इस बार मानसून का सबसे अहम महीना जुलाई उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की मासिक रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में प्रदेश में केवल 109.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 149.1 मिमी है। यानी पूरे प्रदेश में करीब 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसका असर सबसे ज्यादा पश्चिमी और मध्य हरियाणा में देखने को मिला है, जहां अधिकांश जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग के पिछले 26 वर्षों (2000-2026) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2003 में जुलाई के दौरान सबसे अधिक 306.4 मिमी बारिश हुई थी, जबकि 2004 केवल 21 मिमी बारिश के साथ सबसे सूखा जुलाई महीना रहा। वर्ष 2021, 2022 और 2023 में सामान्य से अधिक वर्षा हुई थी, लेकिन 2024 के बाद 2026 में फिर से बड़ा रेन डेफिसिट दर्ज किया गया है।
प्रदेश के 22 जिलों में से 15 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई। सबसे अधिक कमी सिरसा (-74%), जींद (-66%) और रोहतक (-66%) में दर्ज हुई। इसके अलावा हिसार में 45 प्रतिशत और कैथल में 43 प्रतिशत कम बारिश हुई। वहीं पलवल, कुरुक्षेत्र और फरीदाबाद जैसे जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई।
कम बारिश का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है। सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, जींद और रोहतक प्रदेश के प्रमुख कपास और बाजरा उत्पादक जिले हैं। यहां पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों की सिंचाई पर निर्भरता बढ़ेगी। यदि अगस्त में भी बारिश की कमी बनी रही तो फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
उत्तर हरियाणा में अंबाला और पंचकूला में सामान्य से करीब आधी बारिश हुई, जबकि कुरुक्षेत्र में 20 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई। करनाल में केवल 12 प्रतिशत कमी रही। दक्षिण हरियाणा के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और नूंह में बारिश की कमी सीमित रही, जबकि पलवल में सामान्य से 30 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। गुरुग्राम में केवल 7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
पश्चिम हरियाणा में सिरसा, हिसार और फतेहाबाद सबसे अधिक प्रभावित रहे। वहीं मध्य हरियाणा के रोहतक, जींद, कैथल और सोनीपत में 43 से 66 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई। यह इलाका प्रदेश का सबसे बड़ा रेन डेफिसिट जोन बनकर उभरा है।
IMD चंडीगढ़ ने 1 अगस्त को पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। दूसरी ओर हिसार, सिरसा और फतेहाबाद में केवल हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। 3 और 4 अगस्त से मानसून के फिर सक्रिय होने की संभावना है।
बारिश और बादलों के कारण दिन के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। सिरसा 36.4 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म जिला रहा। इसके बाद नारनौल में 36.0 डिग्री और हिसार में 35.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। वहीं रात के समय नारनौल 26.0 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा जिला रहा। अधिक नमी के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह और रात के समय उमस बनी रहने की संभावना है।
pooja