गोल्डन बॉय से पूरे भारत की उम्मीद थी गोल्ड... लेकिन ग्लासगो की ठंडी हवाओं में फिसल गया सपना!

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के जेवलिन फाइनल में नीरज चोपड़ा ने रजत पदक जीता, जबकि पाकिस्तान के अरशद नदीम टॉप-8 में भी जगह नहीं बना सके। नीरज के पिता सतीश चोपड़ा ने गोल्ड से चूकने की दो बड़ी वजहें बताईं।

गोल्डन बॉय से पूरे भारत की उम्मीद थी गोल्ड... लेकिन ग्लासगो की ठंडी हवाओं में फिसल गया सपना!

पूरे भारत को नीरज से गोल्ड की उम्मीद थी, लेकिन मिला सिल्वर
पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम टॉप-8 में भी नहीं पहुंचे
नीरज के पिता बोले- मौसम और पुरानी चोट बनी गोल्ड से चूकने की बड़ी वजह


ग्लासगो/पानीपत। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुष जेवलिन थ्रो स्पर्धा का फाइनल इस बार पूरी तरह रोमांच और उलटफेर से भरा रहा। पूरे देश को उम्मीद थी कि भारत के 'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा एक बार फिर स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचेंगे। वहीं पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम भी गोल्ड के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। लेकिन फाइनल का परिणाम पूरी तरह अलग निकला।

नीरज चोपड़ा ने अपने दूसरे प्रयास में 85.83 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर रजत पदक जीता। वहीं श्रीलंका के रुमेश पथिराजे ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान को लगा, जहां अरशद नदीम शुरुआती तीन प्रयासों के बाद ही शीर्ष-8 में जगह नहीं बना सके और प्रतियोगिता से बाहर हो गए।


भारत को गोल्ड की उम्मीद, लेकिन मिला सिल्वर

फाइनल मुकाबले से पहले पूरे देश की नजरें सिर्फ नीरज चोपड़ा पर थीं। खेल प्रेमियों को भरोसा था कि नीरज एक बार फिर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतेंगे। हालांकि उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जरूर जीता, लेकिन गोल्ड इस बार श्रीलंका की झोली में चला गया।


अरशद नदीम का प्रदर्शन रहा सबसे बड़ा सरप्राइज

भारत-पाकिस्तान की बहुचर्चित टक्कर देखने की उम्मीद लगाए बैठे दर्शकों को निराशा हाथ लगी। ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अरशद नदीम अपने शुरुआती तीन प्रयासों में प्रभाव नहीं छोड़ सके और अंतिम आठ खिलाड़ियों में भी जगह नहीं बना पाए। उनके जल्दी बाहर होने से मुकाबले का पूरा समीकरण बदल गया।


श्रीलंका के रुमेश ने सबको चौंकाया

जिस मुकाबले को नीरज और अरशद की लड़ाई माना जा रहा था, उसमें श्रीलंका के रुमेश पथिराजे ने सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया। उन्होंने 89.75 मीटर का दमदार थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया और राष्ट्रमंडल खेलों में नया इतिहास रच दिया।


नीरज के पहले थ्रो के बाद ताली बजाते हुए चाचा भीम चोपड़ा व साथ में बैठे ग्रामीण।

खंडरा गांव में जश्न, सिल्वर पर भी गर्व

पानीपत के खंडरा गांव में नीरज का पदक तय होते ही परिवार और ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटी। हालांकि सभी को स्वर्ण पदक की उम्मीद थी, लेकिन लगातार एक और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पदक जीतने पर लोगों ने खुशी जाहिर की।


क्या बोले नीरज के पिता सतीश चोपड़ा

नीरज चोपड़ा के पिता सतीश चोपड़ा ने बातचीत में कहा कि बेटे ने एक बार फिर देश के लिए पदक जीतकर गर्व का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि परिवार को उम्मीद स्वर्ण पदक की थी, लेकिन रजत पदक भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।

उन्होंने बताया कि गोल्ड से चूकने की दो बड़ी वजहें रहीं।

पहली वजह ग्लासगो का ठंडा मौसम और तेज हवा रही। उनके अनुसार जिस खिलाड़ी ने शुरुआत में बेहतरीन थ्रो कर लिया, उसके बाद मौसम के कारण बाकी खिलाड़ी उससे आगे नहीं निकल सके।

दूसरी वजह नीरज की हालिया चोट और बड़े मुकाबले का दबाव रहा। उन्होंने कहा कि चोट से पूरी तरह उबरने के बावजूद उसका असर बना हुआ था। इसके बावजूद नीरज ने देश के लिए रजत पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया।


फाइनल परिणाम

पदक खिलाड़ी देश सर्वश्रेष्ठ थ्रो
🥇 स्वर्ण रुमेश पथिराजे श्रीलंका 89.75 मीटर
🥈 रजत नीरज चोपड़ा भारत 85.83 मीटर
❌ बाहर अरशद नदीम पाकिस्तान तीन प्रयासों के बाद बाहर