कुत्ते से टकराने पर कार इंजन सीज, अब बीमा कंपनी देगी इतने लाख, उपभोक्‍ता अदालत का फैंसला पढ़ आप हो जाएंगे हैरान

हरियाणा के रोहतक उपभोक्ता आयोग ने कार इंजन सीज मामले में बीमा कंपनी को 1.9 लाख रुपये ब्याज सहित मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि इंजन कुत्ते से टकराने के कारण सीज हुआ, इसे आंतरिक खराबी नहीं माना जा सकता।

कुत्ते से टकराने पर कार इंजन सीज, अब बीमा कंपनी देगी इतने लाख, उपभोक्‍ता अदालत का फैंसला पढ़ आप हो जाएंगे हैरान

रोहतक उपभोक्ता आयोग ने कार इंजन सीज मामले में दिया बड़ा फैसला
कुत्ते से टकराने के बाद इंजन सीज, बीमा कंपनी को देना होगा मुआवजा
1.9 लाख रुपये ब्याज समेत, साथ ही 10 हजार रुपये हर्जाना और कानूनी खर्च देने के आदेश


रोहतक। हरियाणा के जिला उपभोक्ता आयोग ने कार इंजन सीज होने के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को मुआवजा अदा करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि कार का इंजन कुत्ते से टकराने के बाद सीज हुआ, इसलिए इसे आंतरिक खराबी बताकर बीमा कंपनी क्लेम से इंकार नहीं कर सकती।

मामला झज्जर जिले के गांव खरहर निवासी रिंकू (25) से जुड़ा है, जिन्होंने सितंबर 2019 में यह याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि वह अपनी कार से यात्रा कर रहे थे जब अचानक एक कुत्ता कार के नीचे आ गया। उन्होंने उस समय वाहन को सामान्य समझा और आगे बढ़ गए। लेकिन गोहाना बाईपास टोल के पास पहुंचने पर कार बंद हो गई और अंदर से धुआं निकलने लगा।

रिंकू ने कार एजेंसी से संपर्क किया, जिसके बाद कार को शोरूम ले जाया गया। जांच में पता चला कि इंजन सीज हो गया है और उसे ठीक करने में करीब 1.20 लाख रुपये का खर्च आएगा। एजेंसी ने यह भी बताया कि यह बीमा पॉलिसी के तहत कवर नहीं होता। बीमा कंपनी फ्यूचर जनरल इंडिया इंश्योरेंस ने यह कहकर क्लेम अस्वीकार कर दिया कि इंजन में आंतरिक गड़बड़ी थी, कुत्ते की वजह से नुकसान नहीं हुआ।

मामला उपभोक्ता आयोग में पहुंचा, जहां सर्वेक्षक की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि कार के आगे के हिस्से से कुत्ता टकराया, जिससे इंजन में ओवर हीटिंग हुई और अंततः वह सीज हो गया। आयोग ने कहा कि जब यह स्पष्ट है कि क्षति बाहरी कारण (कुत्ता टकराने) से हुई, तो बीमा कंपनी इंजन की आंतरिक खराबी का बहाना नहीं बना सकती।

आयोग ने अपने फैसले में आदेश दिया कि बीमा कंपनी एक माह के भीतर रिंकू को 1.9 लाख रुपये दे। यह राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित होगी। इसके अलावा, सेवाओं में कमी के लिए पांच हजार रुपये हर्जाना और कानूनी खर्च के रूप में पांच हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएं।

यह फैसला उन सभी वाहन चालकों के लिए राहत की खबर है, जिनके क्लेम को बीमा कंपनियां “आंतरिक खराबी” का हवाला देकर खारिज कर देती हैं। आयोग ने साफ किया कि बीमा का मकसद उपभोक्ता को वास्तविक नुकसान की भरपाई देना है, न कि बहानों के जरिए क्लेम रोकना।