पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड: बचाव पक्ष ने 'सीलबंद गोली' की जांच पर उठाए सवाल
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद काट रहे गुरमीत राम रहीम की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई। वकीलों ने बैलिस्टिक साक्ष्यों को विरोधाभासी बताया।
➤ राम रहीम की उम्रकैद के खिलाफ हाईकोर्ट में सुनवाई, बैलिस्टिक साक्ष्यों पर सवाल
➤ वकीलों ने कहा—सीलबंद गोली की पहले जांच कैसे हुई, अभियोजन का दावा आत्म-विरोधी
➤ बरामद गोलियों और कथित हथियार के मेल पर भी उठे गंभीर संदेह
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में दोषी ठहराए जा चुके डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की ओर से उनकी उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। दोषसिद्धि के लगभग 7 साल बाद, राम रहीम के वकीलों ने अभियोजन पक्ष के सबसे अहम आधार—बैलिस्टिक साक्ष्यों—पर तीखा प्रहार किया।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की पीठ के समक्ष पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बसंत और आर.एस. राय ने तर्क दिया कि अभियोजन का पूरा बैलिस्टिक केस विरोधाभासी और आत्म-विरोधी दावों पर टिका है, जिससे दोषसिद्धि की नींव कमजोर होती है।
सीलबंद गोली पर जांच कैसे हुई?
बचाव पक्ष ने कोर्ट का ध्यान दिलाया कि 22 नवंबर 2002 को दिल्ली के एम्स में पोस्टमार्टम के दौरान पत्रकार छत्रपति के शरीर से जो गोली बरामद हुई थी, उसे प्लास्टिक कंटेनर में रखकर एम्स की सील से सील किया गया था।
वकीलों ने बताया कि जब यह पार्सल 16 अप्रैल 2011 को ट्रायल कोर्ट में बैलिस्टिक विशेषज्ञ की जांच के लिए पेश किया गया, तब भी वह सीलबंद अवस्था में था। कोर्ट की विशेष अनुमति से ही सील खोली गई।
बचाव पक्ष का सवाल था—
“यदि गोली कोर्ट में पेश होने तक सीलबंद थी, तो अभियोजन यह बताए कि उसकी पहले बैलिस्टिक जांच कैसे की गई?” इसी आधार पर अभियोजन के बैलिस्टिक परीक्षण के दावे को आत्म-विरोधी बताया गया।
‘छोटी सी गोली पर हस्ताक्षर असंभव’
अभियोजन पक्ष की ओर से दावा किया गया कि एफएसएल विशेषज्ञ के हस्ताक्षर हथियार के विभिन्न हिस्सों पर मौजूद थे।
इस पर बचाव पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि मानव शरीर से निकली विकृत और छोटी गोली पर किसी तरह का हस्ताक्षर या निशान होना भौतिक रूप से असंभव है। वकीलों ने कहा कि हथियार की नली पर निशान हो सकते हैं, लेकिन शरीर से बरामद गोली पर नहीं, इसलिए अभियोजन का स्पष्टीकरण कृत्रिम और अविश्वसनीय है।
रिवॉल्वर से मेल नहीं खाती गोलियां
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि कथित तौर पर बरामद गोलियों का आकार, प्रकृति और स्थिति, अपराध में इस्तेमाल बताए गए रिवॉल्वर से मेल नहीं खाती। इन विसंगतियों को उन्होंने अभियोजन द्वारा बैलिस्टिक संबंध स्थापित करने के प्रयास की जड़ पर प्रहार बताया, क्योंकि यही साक्ष्य दोषसिद्धि का अहम आधार बना था।
सजा को चुनौती
गौरतलब है कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में गुरमीत राम रहीम सिंह आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर कर अपनी दोषसिद्धि और सजा दोनों को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई जारी है।
Akhil Mahajan