पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जान के खतरे वाले आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी पेशी, जरूरत पड़ने पर मिलेगी सुरक्षा

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने जान के खतरे वाले आरोपियों की सुरक्षा को लेकर अहम आदेश दिया है। ऐसे मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा देने के निर्देश दिए गए हैं।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जान के खतरे वाले आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी पेशी, जरूरत पड़ने पर मिलेगी सुरक्षा

जान का खतरा होने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की अनुमति
व्यक्तिगत पेशी जरूरी होने पर राज्य सरकार करेगी सुरक्षा सुनिश्चित
झज्जर कोर्ट में पेशी को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट का अहम फैसला


पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा की जेलों में बंद ऐसे आरोपियों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है, जिनकी अदालत में पेशी के दौरान जान को खतरा होने की आशंका है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आरोपी की सुरक्षा को लेकर वास्तविक खतरा है तो उसे नियमित रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया जा सकता है। हालांकि, यदि किसी मामले में पहचान या अन्य न्यायिक आवश्यकता के कारण संबंधित अदालत आरोपी की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक समझती है, तो उसे शारीरिक रूप से अदालत में पेश किया जाएगा और उस दौरान उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी।

यह आदेश जस्टिस आलोक जैन ने नरेश यादव उर्फ सेठी द्वारा दायर याचिका का निस्तारण करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि तिहाड़ जेल से हरियाणा, विशेष रूप से झज्जर की अदालतों में पेशी के दौरान उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। याचिका में कहा गया था कि हरियाणा में सक्रिय कुख्यात गैंगस्टरों से उसकी जान को खतरा है।

पहले के आदेश का दिया गया हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने 7 अगस्त 2023 को हाई कोर्ट की समन्वय पीठ द्वारा पारित आदेश का हवाला दिया। उस मामले में भी समान परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश होने की अनुमति दी गई थी।

हाई कोर्ट ने दोहराई अपनी शर्त

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में पूर्व निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आरोपी के जीवन को खतरा होने की आशंका है और वह यह स्वीकार करता है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी होने के कारण वह भविष्य में किसी भी स्तर पर कोई कानूनी आपत्ति या पूर्वाग्रह का दावा नहीं करेगा, तो उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जा सकती है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पहचान या किसी अन्य आवश्यक कारण से संबंधित न्यायाधीश आरोपी की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक समझते हैं, तो उसे अदालत में शारीरिक रूप से पेश किया जाएगा और उस दौरान राज्य सरकार उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

राज्य सरकार ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने याचिका का विरोध नहीं किया, लेकिन यह आपत्ति दर्ज कराई कि भविष्य में याचिकाकर्ता अदालत में व्यक्तिगत पेशी न होने को आधार बनाकर किसी प्रकार का अतिरिक्त कानूनी लाभ नहीं मांग सके। सरकार ने यह भी कहा कि याचिका में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आरोपी को किन व्यक्तियों या समूहों से खतरा है।

पूर्व आदेश की शर्तों पर हुआ निस्तारण

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिका का निस्तारण पूर्व में पारित आदेश की शर्तों के अनुरूप कर दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा उठाई गई आपत्ति भी आदेश का अभिन्न हिस्सा मानी जाएगी।