पंजाब CM कैंप ऑफिस पर CBI की रेड: OSD समेत 6 के खिलाफ FIR, 8 ठिकानों पर तलाशी; मान बोले- सरकार को बदनाम करने की कोशिश

पंजाब CM भगवंत मान के कैंप ऑफिस पर CBI ने तलाशी ली। OSD राजबीर घुमन समेत छह के खिलाफ FIR दर्ज हुई। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

पंजाब CM कैंप ऑफिस पर CBI की रेड: OSD समेत 6 के खिलाफ FIR, 8 ठिकानों पर तलाशी; मान बोले- सरकार को बदनाम करने की कोशिश

➤ चंडीगढ़ स्थित CM कैंप ऑफिस समेत 8 ठिकानों पर CBI की तलाशी
➤ OSD राजबीर सिंह घुमन समेत 6 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में FIR
➤ भगवंत मान ने कार्रवाई को राजनीतिक बताया, पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी


पंजाब की राजनीति में मंगलवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस समेत कई ठिकानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुमन और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले की जांच के सिलसिले में की गई। CBI ने राजबीर सिंह घुमन समेत छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। एजेंसी के अनुसार आरोपों में अधिकारियों की पोस्टिंग, विभागीय कार्रवाई, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग, जमीन के इस्तेमाल और राजस्व से जुड़े मामलों में कथित तौर पर आर्थिक लाभ के बदले प्रभाव डालने और हेरफेर करने की बात शामिल है। कार्रवाई के दौरान CBI ने लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। 

CBI की यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के एक दिन बाद हुई है। हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच CBI को सौंपते हुए आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत के सामने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से साझा की गई सामग्री का भी उल्लेख हुआ था। हाई कोर्ट ने CBI को जांच की प्रगति पर दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। 

मामले में CBI ने राजबीर सिंह घुमन, नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा को आरोपी बनाया है। FIR में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी लोगों का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी का आरोप है कि सरकारी व्यवस्था से जुड़े कई मामलों में कथित तौर पर आर्थिक लाभ के बदले प्रभाव डालने की कोशिश की गई।

CBI के अनुसार आरोपों में IAS और IPS अधिकारियों समेत अधिकारियों की पोस्टिंग, विभागीय कार्यवाही, नीति निर्माण, प्रशासनिक मंजूरी, टेंडर की शर्तें, लाइसेंसिंग, भूमि-उपयोग परिवर्तन, संपत्ति विवाद तथा राजस्व और भूमि संबंधी मामलों को प्रभावित करने की बात शामिल है। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने सरकारी आदेशों और नीतियों को आधिकारिक रूप से जारी किए जाने से पहले उनके मसौदे निजी लोगों तक पहुंचाए। 

FIR दर्ज होने के बाद CBI ने मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस में भी तलाशी ली। इसके अलावा घुमन के घर और उनके एक रिश्तेदार से जुड़े मोहाली के फेज-11 स्थित आवास समेत पंजाब के अलग-अलग शहरों में तलाशी अभियान चलाया गया। CBI के मुताबिक चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में कुल आठ स्थानों पर तलाशी ली गई। 

तलाशी के दौरान CBI ने लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज जब्त किए हैं। एजेंसी का कहना है कि इन सामानों की जांच की जा रही है ताकि कथित रिश्वत और अन्य अनियमितताओं से जुड़े सबूतों का पता लगाया जा सके। CBI ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई CBI जांच

यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में अधिवक्ता निखिल सराफ की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पंजाब पुलिस को दी गई जानकारी के बावजूद मामले में FIR दर्ज कर कार्रवाई नहीं की गई।

हाई कोर्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध सामग्री को देखते हुए CBI को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत बताई और CBI को जांच की प्रगति की रिपोर्ट तय समय में पेश करने को कहा। I

इस मामले की पृष्ठभूमि में ED की ओर से पंजाब के DGP को भेजी गई जानकारी भी महत्वपूर्ण है। इसमें मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों पर सरकारी ट्रांसफर और पोस्टिंग, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, टेंडर और अन्य सरकारी कामकाज से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।

CBI अब इन आरोपों की जांच कर रही है। एजेंसी की ओर से दर्ज FIR और तलाशी के बाद जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपों से जुड़े कोई ठोस सबूत मौजूद हैं या नहीं।

भगवंत मान ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

CBI की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले BJP केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर उनकी सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। मान ने अपने कैंप ऑफिस पर CBI की तलाशी को इसी राजनीतिक संदर्भ से जोड़ते हुए सवाल उठाए। 

मान का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का उद्देश्य पंजाब सरकार और उन्हें बदनाम करना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोगों से मिल रहे समर्थन को देखकर BJP घबराई हुई है। ये मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जबकि CBI की कार्रवाई हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज मामले की जांच के तहत हुई है। 

पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

हाई कोर्ट के CBI जांच के आदेश को पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार ने 6 अक्टूबर 2026 को स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल की है। सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया है कि पंजाब में CBI का अधिकार क्षेत्र पहले से सीमित किया जा चुका है।

इस तरह एक तरफ CBI हाई कोर्ट के आदेश के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ पंजाब सरकार ने इसी जांच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इससे मामला अब जांच के साथ-साथ कानूनी स्तर पर भी आगे बढ़ गया है।

अब जांच के साथ सुप्रीम कोर्ट पर भी नजर

CBI की तलाशी के बाद मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। एजेंसी ने कई स्थानों से डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं। अब इनकी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। दूसरी ओर पंजाब सरकार की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका से यह भी तय होना बाकी है कि हाई कोर्ट के CBI जांच संबंधी आदेश पर आगे क्या कानूनी स्थिति बनती है।

फिलहाल मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस पर CBI की तलाशी, OSD समेत छह लोगों के खिलाफ FIR और आठ स्थानों पर छापेमारी ने पंजाब की सियासत को गरमा दिया है। मामले में आरोपों की जांच अभी जारी है और आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा