8 घंटे के धरने के बाद राहुल-प्रियंका हिरासत में

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8 घंटे के धरने के बाद राहुल-प्रियंका हिरासत में

➤ 8 घंटे से ज्यादा धरने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया
➤ सुबह संसद से निकला ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ आकाशवाणी भवन के पास रोका गया
➤ ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली-मुंबई में 5 दिन के भीतर विपक्ष का 7वां प्रदर्शन


नई दिल्ली में SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन मंगलवार को सुबह के मार्च से शुरू होकर रात में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हिरासत तक पहुंच गया। दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में 8 घंटे से ज्यादा समय से धरने पर बैठे थे। राहुल गांधी ने इससे पहले साफ कहा था कि वे ज्ञानेश कुमार से मिले बिना वहां से नहीं जाएंगे। पुलिस जब उन्हें हटाने पहुंची तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया। इसके बाद पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया।

मंगलवार सुबह करीब 10 बजे संसद के मकर द्वार से विपक्षी दलों का ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ शुरू हुआ था। विपक्षी सांसद SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि दोपहर करीब 12:30 बजे दिल्ली पुलिस ने इस मार्च को आकाशवाणी भवन के पास रोक दिया।

मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने वहीं धरना शुरू कर दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में बैठ गए। इसके बाद कई घंटे तक दोनों नेता धरने पर डटे रहे। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष की ओर से लगातार SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए जाते रहे।

राहुल गांधी ने धरने के दौरान अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा था कि वे ज्ञानेश कुमार से मिले बिना वहां से नहीं जाएंगे। उनका कहना था कि विपक्ष चुनाव आयोग से मुलाकात करना चाहता है। इसी मांग को लेकर धरना जारी रहा और देखते ही देखते प्रदर्शन को कई घंटे बीत गए।

राहुल गांधी का दावा था कि इस प्रदर्शन में 20 विपक्षी पार्टियों के 300 से ज्यादा सांसद मौजूद थे। इनमें अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खड़गे और अभिषेक बनर्जी समेत विपक्ष के कई प्रमुख नेता शामिल रहे। विपक्षी दलों की ओर से इस मार्च और धरने को SIR के विरोध तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जोड़कर देखा गया।

दोपहर में मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को बस में बैठाया गया था। हालांकि दोनों नेता बस से उतर गए और आकाशवाणी भवन परिसर में ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद प्रदर्शन कई घंटे तक जारी रहा।

शाम होते-होते पुलिस ने धरनास्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश शुरू की। जब पुलिस राहुल गांधी को हटाने पहुंची तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच उन्हें हटाने को लेकर खींचतान की स्थिति बनी। इसके बाद पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया।

पुलिस की कार्रवाई से पहले दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया था कि राहुल गांधी के धरने के कारण नई दिल्ली में ट्रैफिक बाधित हो रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी से बातचीत की जा रही थी और उनसे स्वेच्छा से वहां से जाने का आग्रह किया जा रहा था। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा इंतजाम भी बढ़ा दिए गए थे।

धरने के दौरान पुलिस की ओर से यह भी कहा गया था कि रात में प्रदर्शनकारियों को हटाने की तत्काल कोई योजना नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाकर पुलिस को अलर्ट पर रखा गया था, क्योंकि प्रदर्शन के रात तक जारी रहने की संभावना जताई जा रही थी। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और अंत में राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया गया।

पुलिस की कार्रवाई के बाद आकाशवाणी भवन परिसर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत सभी लोगों को हटा दिया गया। इसके बाद धरनास्थल पूरी तरह खाली हो गया। इससे पहले दोनों नेता वहीं बैठकर कई घंटे तक विरोध करते रहे थे।

इसी बीच चुनाव आयोग के सूत्रों की ओर से एक अलग दावा भी सामने आया। उनके मुताबिक राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के दूसरे नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने के लिए अब तक कोई प्रस्ताव या अपॉइंटमेंट नहीं मांगा था। सूत्रों का कहना था कि विपक्षी नेता बिना अपॉइंटमेंट और एजेंडा के सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय जाना चाहते थे।

इस दावे के बीच विपक्ष का कहना था कि वह चुनाव आयोग से मुलाकात करना चाहता है और इसी मांग को लेकर मार्च निकाला गया था। यही मुद्दा मंगलवार के पूरे प्रदर्शन में लगातार सामने आता रहा। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग तक पहुंचने और अपनी बात रखने की मांग कर रहा था, वहीं दूसरी ओर मार्च को रोक दिया गया और बाद में धरने पर बैठे नेताओं को भी हटाया गया।

मंगलवार का प्रदर्शन केवल एक दिन की राजनीतिक गतिविधि नहीं है। दिल्ली और मुंबई में पिछले 5 दिनों में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का यह 7वां प्रदर्शन बताया गया है। इससे साफ है कि SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे का मुद्दा विपक्ष के आंदोलन में लगातार प्रमुख बना हुआ है।

सुबह संसद के मकर द्वार से शुरू हुआ मार्च दोपहर में आकाशवाणी भवन के पास रुक गया। इसके बाद धरना कई घंटे चला और रात में पुलिस की कार्रवाई के साथ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हिरासत हुई। इस तरह एक ही दिन में प्रदर्शन ने कई चरण देखे और आखिर में हिरासत तक पहुंच गया।

राहुल गांधी के धरने पर बने रहने और ज्ञानेश कुमार से मिले बिना नहीं जाने के बयान के बाद प्रदर्शनकारियों में भी लगातार उत्साह बना रहा। पुलिस द्वारा उन्हें हटाने की कोशिश के दौरान कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी को घेर लिया। बाद में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया।

पूरे घटनाक्रम में SIR, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, विपक्ष का मार्च और चुनाव आयोग से मुलाकात मुख्य मुद्दे बने रहे। वहीं पुलिस की ओर से ट्रैफिक बाधित होने की बात सामने आई। दूसरी ओर चुनाव आयोग के सूत्रों ने अपॉइंटमेंट नहीं मांगे जाने का दावा किया।

अब मंगलवार के प्रदर्शन का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम 8 घंटे से ज्यादा चले धरने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हिरासत है। सुबह शुरू हुआ ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ रात तक पहुंचते-पहुंचते पुलिस कार्रवाई में बदल गया। दिल्ली और मुंबई में 5 दिनों के भीतर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 7वां प्रदर्शन होने के साथ यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है।