अखिलेश और अभिषेक बनर्जी हिरासत में, राहुल-प्रियंका आकाशवाणी बिल्डिंग के सामने धरने डटे

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी बिल्डिंग के बाहर धरने पर बैठे, अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी हिरासत में, चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का सातवां प्रदर्शन

अखिलेश और अभिषेक बनर्जी हिरासत में,  राहुल-प्रियंका आकाशवाणी बिल्डिंग के सामने धरने डटे

➤ राहुल-प्रियंका ने आकाशवाणी बिल्डिंग के बाहर बैठकर किया धरना
➤ अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी को पुलिस ने हिरासत में लिया
➤ 19 विपक्षी दलों के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ निकाला मार्च


नई दिल्ली। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को उस समय और तेज हो गया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी बिल्डिंग के सामने धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के सांसद दिल्ली में ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकालते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। प्रदर्शनकारी चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों और एसआईआर को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे थे तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। यह प्रदर्शन दिल्ली और मुंबई में पांच दिनों के भीतर विपक्ष का सातवां विरोध प्रदर्शन बताया गया है।

विपक्षी सांसदों का मार्च नई संसद भवन से शुरू हुआ था। मार्च में करीब 19 विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी। प्रदर्शन के दौरान सांसदों को कई बार रोका गया। करीब ढाई घंटे तक चले घटनाक्रम में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार गतिरोध बना रहा।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लेकर बस में बैठाया। इसके बाद दोनों बस से उतरकर आकाशवाणी बिल्डिंग के अंदर चले गए। कुछ देर बाद वे बाहर आए और बिल्डिंग के सामने ही धरने पर बैठ गए। आकाशवाणी बिल्डिंग चुनाव आयोग के कार्यालय से करीब 270 मीटर की दूरी पर बताई गई है। राहुल और प्रियंका के धरने पर बैठने के बाद प्रदर्शन ने एक बार फिर राजनीतिक रूप ले लिया।

मार्च के दौरान राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़ते हुए भी नजर आए। उनके हाथ में तिरंगा था। इस दौरान उन्होंने एक पोस्टर भी दिखाया, जिस पर “Gyanesh, It’s Done Bro” लिखा हुआ था। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।

इस प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी को भी पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई। विपक्षी नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए निकले सांसदों को रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है।

अखिलेश यादव ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष हैं तो उन्हें विपक्ष की बात सुननी चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र को बचाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।

विपक्षी दलों का मुख्य विरोध एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की आशंका है और इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को रोकने और चुनाव आयोग की भूमिका पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। इसके अलावा विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाए।

दिल्ली में लगातार हो रहे इन प्रदर्शनों के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने संसद और चुनाव आयोग के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई। विपक्षी सांसदों और पुलिस के बीच कई बार बातचीत और गतिरोध की स्थिति बनी।

पिछले पांच दिनों में दिल्ली और मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का यह सातवां प्रदर्शन है। विपक्षी दलों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक वे इस मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहेंगे। वहीं, पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव को एक बार फिर सामने ला दिया है।