वीरभद्र की ‘लीगेसी’ पर छलका प्रतिभा सिंह का दर्द: बोलीं- राजा साहब को गुजरे 4 साल ही हुए, पोस्टर से फोटो गायब, मंच पर भी जिक्र नहीं
प्रतिभा सिंह ने रोहड़ू और रामपुर कार्यक्रमों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर और नाम नहीं होने पर नाराजगी जताई और उनकी विरासत अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की बात कही।
➤ रोहड़ू-रामपुर के कार्यक्रमों में वीरभद्र सिंह की फोटो नहीं होने पर प्रतिभा सिंह ने जताई नाराजगी
➤ बोलीं- भाषण में राजा साहब के काम गिनाते, ताकि अगली पीढ़ी उनके योगदान को जानती
➤ वीरभद्र की विरासत को लेकर कांग्रेस के भीतर पुरानी राजनीतिक खींचतान फिर चर्चा में
हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर कांग्रेस के भीतर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी और हिमाचल कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हालिया रोहड़ू और रामपुर दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री की अनदेखी पर नाराजगी जताई है। प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी चार-साढ़े चार साल ही हुए हैं और इतनी जल्दी उन्हें भुला दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि रोहड़ू जैसे स्थान पर, जो वीरभद्र सिंह की राजनीतिक कर्मभूमि रही है, कार्यक्रम के पोस्टरों में उनकी तस्वीर नहीं थी और मंच से भाषण के दौरान भी उनका नाम नहीं लिया गया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बीते शुक्रवार को रोहड़ू और शनिवार को रामपुर विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। इन कार्यक्रमों के दौरान लगाए गए पोस्टरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर दिखाई नहीं दी। रोहड़ू का वीरभद्र सिंह के राजनीतिक जीवन में विशेष महत्व रहा है। यहीं से उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और बाद में हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रतिभा सिंह ने इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को रोहड़ू में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि अगर आयोजकों ने वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं लगाई तो कम से कम अपने लोगों को ही आगे आकर पोस्टर बनाकर लगाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि अपने स्तर पर भी करीब 20 पोस्टर लगाए जा सकते थे।
प्रतिभा सिंह ने सिर्फ पोस्टर में तस्वीर नहीं होने का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि मंच से वीरभद्र सिंह का नाम नहीं लिए जाने पर भी सवाल किया। उन्होंने कहा कि जब भाषण हो रहा था, तब राजा साहब का जिक्र किया जा सकता था। उनके कामों को बताया जाना चाहिए था और यह कहा जाना चाहिए था कि उन्होंने हिमाचल के लिए क्या-क्या काम किए और आज भी लोग उन्हें याद करते हैं।
प्रतिभा सिंह के मुताबिक ऐसा करने से अगली पीढ़ी को भी वीरभद्र सिंह के योगदान के बारे में जानने का मौका मिलता। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि कार्यक्रम में वीरभद्र सिंह का जिक्र तक नहीं किया गया।
उन्होंने इस बात को हिमाचल के निर्माता और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार के उदाहरण से भी जोड़ा। प्रतिभा सिंह ने कहा कि जब सिरमौर में कोई कार्यक्रम या बैठक होती है तो डॉ. यशवंत सिंह परमार का नाम लिए बिना आगे नहीं बढ़ते, क्योंकि वे हिमाचल के निर्माता थे और सिरमौर से उनका संबंध था। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार उनके लिए आदरणीय और पूजनीय हैं।
इसी क्रम में प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह ने भी हिमाचल के लिए कोई कमी नहीं रखी। उनके अनुसार राजा साहब भी उनके लिए माननीय और सम्माननीय हैं। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह को याद रखना और उनकी उपलब्धियों के बारे में अगली पीढ़ी को बताना उनका कर्तव्य है।
प्रतिभा सिंह के इस बयान के बाद हिमाचल कांग्रेस की राजनीति में वीरभद्र सिंह की विरासत को लेकर बहस फिर चर्चा में आ गई है। रोहड़ू और रामपुर दोनों जगह मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के पोस्टरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं होने और मंच से उनका नाम नहीं लिए जाने को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रोहड़ू उनकी कर्मभूमि रही है। उन्होंने यहीं से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इसके अलावा वे कई बार सांसद और विधायक भी रहे। हिमाचल की राजनीति में उनका करीब छह दशक लंबा राजनीतिक जीवन रहा।
वीरभद्र सिंह और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बीच राजनीतिक मतभेदों की चर्चा भी हिमाचल की राजनीति में लंबे समय से होती रही है। इसी पृष्ठभूमि में प्रतिभा सिंह का ताजा बयान कांग्रेस के भीतर वीरभद्र सिंह परिवार और मौजूदा संगठनात्मक नेतृत्व के बीच मतभेदों की चर्चा को फिर सामने लाता है।
वीरभद्र सिंह की अनदेखी से जुड़ा विवाद इससे पहले भी सामने आ चुका है। फरवरी 2024 में लोक निर्माण मंत्री और वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने अपने मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। उस समय रिज पर वीरभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापित करने का मुद्दा चर्चा में था। हालांकि हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद विक्रमादित्य सिंह का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया और उन्हें मना लिया गया। बाद में रिज पर वीरभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापित कर दी गई।
अब प्रतिभा सिंह के बयान ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि कांग्रेस की मौजूदा राजनीति में वीरभद्र सिंह की विरासत और उनके योगदान को किस तरह याद किया जा रहा है। प्रतिभा सिंह का जोर इस बात पर है कि पूर्व मुख्यमंत्री के काम और योगदान को केवल परिवार या उनके समर्थकों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि अगली पीढ़ी को भी उनके बारे में बताया जाना चाहिए।
वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे। वे छह बार मुख्यमंत्री रहे और लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहे। ऐसे में रोहड़ू और रामपुर के कार्यक्रमों में उनकी तस्वीर और नाम नहीं होने को लेकर प्रतिभा सिंह की नाराजगी ने वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को फिर से हिमाचल की सियासत का मुद्दा बना दिया है।
फिलहाल प्रतिभा सिंह के बयान के बाद सवाल यही है कि वीरभद्र सिंह की विरासत को लेकर कांग्रेस के भीतर आगे क्या राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आती है। रोहड़ू से उठी यह आवाज सिर्फ एक पोस्टर या कार्यक्रम में नाम नहीं लिए जाने तक सीमित रहती है या पार्टी के भीतर पुराने और नए नेतृत्व के बीच चल रही विरासत की बहस को फिर तेज करती है, इस पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।
Akhil Mahajan