निजी डाक्‍टर की सलाह पर सर्जिकल ब्‍लेड और इंजेक्‍शन खरीदने के बाद छात्र ने खुद काटा निजी अंग, लड़की बनने की चाहत में उठाया खतरनाक कदम, जानें अगे क्‍या हुआ

प्रयागराज में लड़की बनने की चाहत में यूपीएससी तैयारी कर रहे छात्र ने खुद ही निजी अंग काट दिया। निजी चिकित्सक की सलाह पर खरीदा इंजेक्शन और ब्लेड, दर्द बढ़ने पर अस्पताल पहुंचा, फिलहाल प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती।

निजी डाक्‍टर की सलाह पर सर्जिकल ब्‍लेड और इंजेक्‍शन खरीदने के बाद  छात्र ने खुद काटा निजी अंग, लड़की बनने की चाहत में उठाया खतरनाक कदम, जानें अगे क्‍या हुआ
  • लड़की बनने की चाहत में छात्र ने खुद ही निजी अंग काटा
  • निजी चिकित्सक की सलाह पर खरीदा इंजेक्शन और सर्जिकल ब्लेड
  • दर्द बढ़ने पर मकान मालिक ने पहुंचाया अस्पताल, प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती

एक सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 17 वर्षीय छात्र ने लड़की बनने की चाहत में अपने ही निजी अंग को काट डाला। छात्र ने यह खतरनाक कदम उठाने से पहले एक निजी चिकित्सक से सलाह ली थी। डॉक्टर ने उसे बताया कि लड़की बनने के लिए पहले निजी अंग काटना होगा और यह भी समझाया कि घर पर ही इसे कैसे किया जा सकता है।

इसके बाद छात्र ने एनेस्थीसिया का इंजेक्शन, सर्जिकल ब्लेड, रुई और अन्य सामान खरीदा। कमरे में अकेले रहते हुए उसने खुद को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया। कमर से नीचे का हिस्सा सुन्न होते ही उसने अपने ही हाथों से निजी अंग काट दिया और मरहम पट्टी कर ली। शुरुआत में उसे कोई दर्द नहीं हुआ, लेकिन छह घंटे बाद जब एनेस्थीसिया का असर कम हुआ तो वह तड़प उठा। दर्द सहन न कर पाने पर उसने मकान मालिक से मदद मांगी। मकान मालिक ने एंबुलेंस बुलाकर छात्र को बेली अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया।

डॉ. संतोष सिंह (असिस्टेंट प्रोफेसर, सर्जरी विभाग, एसआरएन अस्पताल) ने प्राथमिक उपचार के बाद केस को प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हवाले कर दिया। विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित जैन का कहना है कि छात्र को सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन केस गंभीर है।

छात्र ने अस्पताल में डॉक्टरों को बताया कि उसे लड़कियों में कोई इंट्रेस्ट नहीं है। उसे लगता है कि उसकी आवाज़, चलने का ढंग और स्वभाव लड़कियों जैसा है, इसलिए वह जेंडर चेंज करना चाहता था। उसे यह अंदाजा नहीं था कि उसकी जान भी जा सकती है।

छात्र की मां ने कहा कि उन्होंने बेटे को यूपीएससी की तैयारी के लिए प्रयागराज भेजा था और आईएएस बनाने का सपना देखा था। लेकिन बेटे के मन की बात कभी सामने नहीं आई। मां ने कहा कि अब वह सिर्फ यही दुआ करती हैं कि बेटा पूरी तरह ठीक हो जाए। यह अमेठी का मामला है। 

मनोचिकित्सक डॉ. राकेश पासवान का कहना है कि इसे जेंडर आइडेंटिटी डिसऑर्डर कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपने जेंडर से संतुष्ट नहीं होता और खुद से घृणा करने लगता है। ऐसे मामलों में काउंसलिंग बेहद जरूरी होती है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. आशीष सक्सेना का कहना है कि समाज में पुरुषों के सम्मान की कमी और महिलाओं को मिले सम्मान की चाह भी इसका एक कारण हो सकता है।

फिलहाल छात्र प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती है और डॉक्टर उसे सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास कर रहे हैं।