CAG रिपोर्ट के बाद कार्रवाई: हरियाणा में किताब खरीद में गड़बड़ी, 8 पब्लिशर्स ब्लैकलिस्ट

हरियाणा में सरकारी कॉलेजों की किताब खरीद में करोड़ों की गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकार ने 8 बड़े पब्लिशर्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

CAG रिपोर्ट के बाद कार्रवाई: हरियाणा में किताब खरीद में गड़बड़ी, 8 पब्लिशर्स ब्लैकलिस्ट

➤ किताब खरीद में करोड़ों की गड़बड़ी उजागर
➤ 8 बड़े पब्लिशर्स को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया गया
➤ कई कॉलेजों में किताबें पहुंची ही नहीं, फिर भी हुआ भुगतान


हरियाणा के सरकारी कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में किताबों की खरीद में सामने आई बड़ी गड़बड़ी के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाया है। उच्चतर शिक्षा विभाग (DGHE) के महानिदेशक एस. नारायणन (IFS) ने आदेश जारी कर देश के 8 बड़े बुक पब्लिशर्स को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब प्रदेश का कोई भी सरकारी कॉलेज इन पब्लिशर्स से किसी भी प्रकार की किताब नहीं खरीद सकेगा।

यह कार्रवाई CAG (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए करोड़ों रुपए के घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं के बाद की गई है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि प्रदेश के 149 सरकारी कॉलेजों की लाइब्रेरी के लिए किताबों की खरीद में नियमों को दरकिनार कर भारी गड़बड़ी की गई।

जांच में सामने आया कि विभाग ने बिना किताबों की वास्तविक सप्लाई सुनिश्चित किए ही पब्लिशर्स को करोड़ों रुपए का एडवांस भुगतान कर दिया। कई कॉलेजों में आज तक संबंधित किताबें पहुंची ही नहीं, जबकि भुगतान पहले ही कर दिया गया था। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।

ऑडिट के दौरान यह भी पाया गया कि कई मामलों में पब्लिशर्स ने किताबों की मूल कीमत से कई गुना ज्यादा रेट वसूले। बाजार में थोक खरीद पर मिलने वाले 30 से 35 प्रतिशत डिस्काउंट की बजाय केवल 10 प्रतिशत डिस्काउंट दिखाकर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

भौतिक जांच के दौरान कई सरकारी कॉलेजों की लाइब्रेरी में संबंधित पब्लिशर्स की किताबें मौजूद ही नहीं मिलीं। इससे साफ हुआ कि कई जगह केवल कागजों में सप्लाई दिखाकर भुगतान उठाया गया। जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले में अधिकारियों और पब्लिशर्स की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद सरकारी कॉलेजों में किताब खरीद प्रक्रिया को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि भविष्य में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता या मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।