जिसे देश कचरा समझता है, पानीपत उसे बना देता है करोड़ों की दौलत

हरियाणा का पानीपत देश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग हब बनकर उभरा है। यहां रोजाना हजारों टन पुराने कपड़ों के कचरे की प्रोसेसिंग कर उन्हें दोबारा उपयोग के लायक बनाया जा रहा है।

जिसे देश कचरा समझता है, पानीपत उसे बना देता है करोड़ों की दौलत

देश के टेक्सटाइल कचरे को नई पहचान दे रहा है हरियाणा का पानीपत
रोज 3,500 से 5,250 टन पुराने कपड़ों की होती है रीसाइक्लिंग
नवी मुंबई और दिल्ली के मंगोलपुरी के साथ मिलकर बना देश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल सर्कुलर मॉडल


पानीपत। क्या आपने कभी सोचा है कि आपके पुराने और बेकार हो चुके कपड़े आखिर जाते कहां हैं? जिन कपड़ों को लोग कचरा समझकर फेंक देते हैं, वही अब हरियाणा के पानीपत में करोड़ों रुपये की अर्थव्यवस्था और हजारों लोगों की रोजी-रोटी का जरिया बन रहे हैं। यही वजह है कि पानीपत आज देश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग हब बनकर उभरा है।

देश में हर साल लाखों टन कपड़ों का कचरा निकलता है। इस कचरे को दोबारा उपयोग में लाने की सबसे अहम कड़ी अब नवी मुंबई, पानीपत और दिल्ली का मंगोलपुरी बन चुके हैं। इन तीनों शहरों की अलग-अलग भूमिका है, लेकिन मकसद एक ही है—पुराने कपड़ों को लैंडफिल में जाने से रोकना और उन्हें फिर से उपयोगी बनाना।

पानीपत क्यों बना देश का टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग हब?

अगर नवी मुंबई कपड़ों के कचरे को वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा करने का मॉडल है, तो हरियाणा का पानीपत उस कचरे को नई जिंदगी देने का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।

देशभर के टेक्सटाइल उद्योगों से निकलने वाला कपड़े का कचरा बड़ी मात्रा में पानीपत पहुंचता है। यहां विशेषज्ञों द्वारा उसकी छंटाई, प्रोसेसिंग, धागा तैयार करना, बुनाई और रीसाइक्लिंग की जाती है। इसके बाद यही कपड़ा नए उत्पादों के रूप में बाजार में पहुंचता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पानीपत में रोजाना करीब 3,500 से 5,250 टन कपड़ों के कचरे का प्रबंधन किया जाता है। यही वजह है कि अब इसे डाउनस्ट्रीम टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग हब कहा जाने लगा है।

दिल्ली और मुंबई निभा रहे अहम भूमिका

नवी मुंबई में देश की पहली म्युनिसिपल टेक्स्टाइल रिकवरी फैसिलिटी बनाई गई है, जहां पुराने कपड़ों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान, छंटाई और अपसाइक्लिंग की जाती है।

वहीं दिल्ली का मंगोलपुरी कपड़ों की कतरन का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। यहां नोएडा, गुरुग्राम, मानेसर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाले कपड़ों की छंटाई होती है। इसके बाद यह सामग्री आगे रीसाइक्लिंग के लिए पानीपत भेजी जाती है।

कचरे से तैयार हो रही नई अर्थव्यवस्था

विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग सिर्फ पर्यावरण बचाने का अभियान नहीं, बल्कि रोजगार और उद्योग का भी बड़ा माध्यम बन चुकी है। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है और कपड़ों का कचरा दोबारा उपयोग में लाकर प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भी कम किया जा रहा है।

दुनियाभर में सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबल फैशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में पानीपत का मॉडल भारत के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

भविष्य में और बढ़ेगा पानीपत का महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में पानीपत न सिर्फ हरियाणा बल्कि पूरे देश की ग्रीन इकोनॉमी का प्रमुख केंद्र बन सकता है।