सीएम नायब सैनी के हस्तक्षेप से सुलझा पानीपत रिफाइनरी विवाद, जानें
Panipat Refinery dispute, Nayab Singh Saini, worker salary issue, PF deposit order, IOCL action
■ 6 घंटे की बैठक बेनतीजा, सीएम दखल के बाद बनी सहमति
■ ठेकेदारों को वेतन व 25% पीएफ जमा कराने के सख्त आदेश
■ गड़बड़ी पर एफआईआर और ब्लैकलिस्टिंग की चेतावनी
हरियाणा के पानीपत स्थित रिफाइनरी में पिछले दिनों से चल रहा वेतन और पीएफ विवाद आखिरकार सुलझ गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन और प्रबंधन ने कर्मचारियों की सभी जायज मांगों को लिखित रूप में स्वीकार कर लिया। इससे पहले करीब 6 घंटे चली बैठक में भी कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी थी, लेकिन सीएम स्तर पर हस्तक्षेप के बाद मामला पटरी पर आ गया।
जिला उपायुक्त डॉ. वीरेन्द्र कुमार दहिया ने सभी ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे शुक्रवार तक अपनी-अपनी लेबर को बुलाकर लंबित भुगतान सुनिश्चित करें। साथ ही फरवरी माह की सैलरी होली से पहले जारी करने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि कर्मचारियों के वेतन से 12 प्रतिशत पीएफ कटौती और 13 प्रतिशत ठेकेदार अंशदान मिलाकर कुल 25 प्रतिशत पीएफ जमा होना चाहिए। सभी रिकॉर्ड दुरुस्त कर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
डीसी ने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। रिफाइनरी के आसपास शराब के ठेकों को आगामी आदेश तक बंद करने और करनाल की ओर नाके लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एसपी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि त्योहारी सीजन को देखते हुए कर्मचारियों को समय पर वेतन और भत्ते मिलना आवश्यक है। ठेकेदारों को अपने सुपरवाइजरों और सब-कॉन्ट्रैक्टरों के माध्यम से कर्मचारियों से संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
रिफाइनरीज के डायरेक्टर अरविंद कुमार ने ठेकेदारों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब रिफाइनरी की क्षमता बढ़ाई जा रही है और बड़ी कंपनियों को काम दिया गया है, तो कर्मचारियों के हितों से खिलवाड़ शर्मनाक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी कंपनी ने समय पर भुगतान नहीं किया तो इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड उसे ब्लैकलिस्ट करने में कोई कोताही नहीं बरतेगा।
कर्मचारियों का आरोप था कि उन्हें 2013 के वेतनमान के आधार पर भुगतान दिखाया जा रहा है और सुविधाएं भी नहीं दी जा रहीं। इसी के विरोध में वे काम पर नहीं गए थे। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए अन्य जिलों से पांच डीएसपी, करनाल और कैथल पुलिस सहित मधुबन पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल तैनात किया गया।
सीएम के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल माहौल सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन प्रशासन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि श्रमिकों के हितों से समझौता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Akhil Mahajan