सरकार को करोड़ों का GST राजस्व देने वालों को मिला 'जलभराव का दर्द'! बारिश में डूबी इंडस्ट्रियल एरिया की सड़क, शासन प्रशासन पर उठे सवाल

पानीपत-घरौंडा के अलीपुर से खोदपूरा तक सड़क की बदहाली से उद्योगपति, कर्मचारी, ग्रामीण और स्कूली बच्चे परेशान हैं। बारिश में 3 से 4 फीट पानी जमा होने की शिकायत है। उद्योगपतियों ने सड़क निर्माण और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की मांग की है।

सरकार को करोड़ों का GST राजस्व देने वालों को मिला 'जलभराव का दर्द'! बारिश में डूबी इंडस्ट्रियल एरिया की सड़क, शासन प्रशासन पर उठे सवाल

अलीपुर से खोदपूरा तक बदहाल सड़क, बारिश में 3 से 4 फीट पानी
उद्योगपतियों का दावा- एक दिन का GST सड़क निर्माण के लिए काफी
उद्योगपति, कर्मचारी, ग्रामीण और स्कूली बच्चे आवागमन में परेशान


पानीपत/घरौंडा। हरियाणा का पानीपत देश और दुनिया में अपनी टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है। यहां की फैक्ट्रियां हजारों लोगों को रोजगार देने के साथ सरकार को हर दिन करोड़ों रुपये का राजस्व भी देती हैं। लेकिन इसी औद्योगिक क्षेत्र के बीच अलीपुर से खोदपूरा तक सड़क की बदहाली ऐसी तस्वीर सामने ला रही है, जो सरकार के विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है।

यह सड़क घरौंडा विधानसभा क्षेत्र के अलीपुर गांव से पानीपत ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के खोदपूरा गांव तक जाती है। सड़क के आसपास बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। इसके बावजूद सड़क की हालत खराब होने और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या के कारण उद्योगपतियों, कर्मचारियों, स्थानीय ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, अलीपुर गांव के सरकारी स्कूल के आसपास से लेकर खोदपूरा गांव तक कई जगह सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बाइक और छोटी गाड़ी से इस रास्ते से गुजरना भी चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है।

सड़क है या मुसीबत का रास्ता?

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह परेशानी बनी हुई है। सबसे बड़ी समस्या बारिश के दौरान जलभराव की है। कई हिस्सों में 3 से 4 फीट तक पानी जमा होने की शिकायत सामने आ रही है। जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा रहता है। पानी भरने के बाद सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य दिनों में भी सड़क की स्थिति परेशानी वाली है, जबकि बारिश के दौरान हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं।

उद्योगपतियों की चिंता, कारोबार पर पड़ रहा असर

इस क्षेत्र में संचालित औद्योगिक इकाइयों के संचालकों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति का असर सीधे उनके कारोबार पर पड़ रहा है। उद्योगपतियों के मुताबिक, किसी कंपनी का ग्राहक, खरीदार या कारोबारी प्रतिनिधि जब इस क्षेत्र में आने की कोशिश करता है तो उसे खराब सड़क और जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को लेकर बाहर से आने वाले लोगों के बीच सवाल खड़े होते हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि जिस इलाके में करोड़ों रुपये का कारोबार होता है और सरकार को GST के रूप में बड़ा राजस्व मिलता है, वहां बुनियादी सड़क सुविधा का इस तरह बदहाल होना चिंता का विषय है। उनका तर्क है कि वे सरकार को नियमित रूप से टैक्स और GST के रूप में राजस्व देते हैं। यदि इस क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा भी बुनियादी सुविधाओं पर लगाया जाए तो सड़क की समस्या का समाधान किया जा सकता है।

‘एक दिन का GST सड़क बनाने के लिए काफी’—उद्योगपतियों का दावा

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि वे सरकार को प्रतिदिन बड़ी मात्रा में GST और अन्य टैक्स देते हैं। कुछ उद्योगपतियों का दावा है कि एक दिन में सरकार को मिलने वाला राजस्व ही इस सड़क के निर्माण के लिए पर्याप्त हो सकता है। हालांकि, यह उद्योगपतियों का दावा है और इसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि संबंधित विभाग से होना बाकी है। यही दावा अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। यदि सरकार को लगातार राजस्व देने वाला औद्योगिक क्षेत्र ही खराब सड़क, जलभराव और आवागमन की समस्या से जूझ रहा है तो यहां काम करने वाले कर्मचारियों और आसपास रहने वाले लोगों की स्थिति क्या होगी।

बारिश आते ही सड़क बन जाती है तालाब

स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के दौरान इस सड़क की स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई स्थानों पर पानी इतना अधिक भर जाता है कि सड़क और आसपास के खाली हिस्से में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी निकलने में समय लगता है। ऐसे में रोजाना इस रास्ते से आने-जाने वाले कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ती है।सबसे ज्यादा परेशानी उन कर्मचारियों को होती है जो बाइक और दूसरे दोपहिया वाहनों से अपनी ड्यूटी पर पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खराब सड़क और जलभराव के कारण छोटे-बड़े हादसों की स्थिति बनी रहती है।

स्कूली बच्चों के लिए भी परेशानी

इस सड़क का इस्तेमाल केवल औद्योगिक इकाइयों में आने-जाने वाले कर्मचारियों द्वारा नहीं किया जाता। आसपास के गांवों के लोग और स्कूली बच्चे भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। बारिश के दौरान सड़क पर पानी भरने से बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सड़क पर पानी जमा हो जाता है तो बच्चों को स्कूल पहुंचाने और वापस घर लाने में अभिभावकों को भी परेशानी होती है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस रास्ते से रोजाना बच्चे, कर्मचारी, ग्रामीण और उद्योगपति गुजरते हैं, उसकी स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

‘बायर को कैसे बुलाएं?’

इंडस्ट्री संचालकों की एक बड़ी चिंता कारोबार और ग्राहकों को लेकर है। उनका कहना है कि किसी भी उद्योग के लिए ग्राहक और खरीदार बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन जब कोई कारोबारी इस क्षेत्र में पहुंचने के लिए सड़क की ऐसी स्थिति देखता है तो उसके सामने क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। उद्योगपतियों का कहना है कि खराब सड़क के कारण बाहरी लोगों के सामने क्षेत्र की खराब छवि बन रही है। उनका मानना है कि इसका असर भविष्य के कारोबार पर भी पड़ सकता है। उद्योगपतियों को आशंका है कि यदि समय रहते सड़क और जल निकासी की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में यहां से कुछ उद्योग दूसरी जगहों का रुख करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

विकास के दावों के बीच जमीनी तस्वीर पर सवाल

हरियाणा सरकार लगातार प्रदेश में विकास और औद्योगिक विस्तार की बात करती रही है। उद्योगों को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने की योजनाओं की चर्चा होती है। लेकिन अलीपुर से खोदपूरा तक सड़क की स्थिति इन दावों की जमीनी तस्वीर पर सवाल खड़े करती नजर आती है। एक तरफ सरकार उद्योगों को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताती है, वहीं दूसरी तरफ उद्योगों तक पहुंचने वाला रास्ता ही बदहाल हो तो सवाल उठना लाजिमी है।

विधानसभा अध्यक्ष और विधायक हरविंदर कल्याण के क्षेत्र में सड़क की हालत

यह पूरा क्षेत्र घरौंडा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यहां से विधायक हरविंदर कल्याण हैं, जो हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों और उद्योगपतियों की नजर अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर है। लोगों की मांग है कि इस सड़क का जल्द से जल्द निरीक्षण कराया जाए। इसकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए और सड़क निर्माण के साथ-साथ जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए।

जिम्मेदार पक्ष से कैमरे के सामने बातचीत की कोशिश

इस पूरे मामले को लेकर जब हमारी टीम ने संबंधित जिम्मेदार पक्ष से कैमरे के सामने बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने कैमरे के सामने आने के बजाय अपना जवाब अन्य माध्यम से देने की बात कही। अब सड़क की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद लोगों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई पर है। क्या सड़क का निर्माण कराया जाएगा। क्या जल निकासी की स्थायी व्यवस्था होगी। क्या इंडस्ट्री क्षेत्र की समस्याओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कोई विशेष योजना बनाई जाएगी सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले इस औद्योगिक क्षेत्र को उसकी बुनियादी सुविधाएं कब मिलेंगी।

अब देखना होगा कब बदलेगी तस्वीर

फिलहाल अलीपुर से खोदपूरा तक सड़क की बदहाली से उद्योगपति, कर्मचारी, ग्रामीण और स्कूली बच्चे परेशान हैं इंडस्ट्री संचालकों का कहना है कि खराब सड़क के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है और रोजाना नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की मांग है कि समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि सिर्फ कागजों में विकास और जमीनी स्तर पर बदहाल सड़क के बीच का अंतर अब साफ दिखाई दे रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले इस औद्योगिक क्षेत्र की सड़क कब तक बनती है। क्योंकि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं रहेगा। सवाल यह भी रहेगा कि जिस इंडस्ट्री से सरकार को राजस्व और हजारों परिवारों को रोजगार मिलता है, क्या उस इंडस्ट्री को बुनियादी सुविधाएं देना भी सरकार की प्राथमिकता है।