नर्सों की हड़ताल दूसरे दिन जारी,ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध, वर्दी भत्ता लागू करने की मांग

प्रदेश भर में नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल दूसरे दिन जारी है। नर्सें ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी वापस लेने, वर्दी भत्ता लागू करने और सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रही हैं।

नर्सों की हड़ताल दूसरे दिन जारी,ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध, वर्दी भत्ता लागू करने की मांग

➤ प्रदेश भर में नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध
➤ 98 प्रतिशत महिला नर्सिंग स्टाफ ने दूर तैनाती पर सुरक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर जताई चिंता
➤ ट्रांसफर पॉलिसी वापस लेने और वर्दी भत्ता लागू करने की मांग, मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

प्रदेश भर में नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। नर्सों ने ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध करते हुए सरकार से इसे वापस लेने और वर्दी भत्ता लागू करने की मांग की है। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर वे कई बार सरकार और अधिकारियों को पत्र दे चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। इसके चलते नर्सों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया है।

नर्सिंग स्टाफ की जिला प्रधान दीपा ने कहा कि नर्सों की ड्यूटी 24 घंटे चलती है और उन्हें मॉर्निंग, इवनिंग और नाइट शिफ्ट में काम करना पड़ता है। ऐसे में यदि उन्हें घर से काफी दूर ट्रांसफर कर दिया जाता है तो रोजाना आने-जाने में परेशानी के साथ उनकी सुरक्षा का सवाल भी खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि नर्सिंग स्टाफ में करीब 98 प्रतिशत महिलाएं हैं। ऐसे में दूर-दराज के स्थानों पर तैनाती से महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियों पर भी असर पड़ेगा।

नर्सों का आरोप है कि सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह लागू नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में दूर के स्थानों पर ट्रांसफर करने से पहले कर्मचारियों की व्यावहारिक परेशानियों और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए था।

ट्रांसफर पॉलिसी बनाने से पहले चर्चा नहीं करने का आरोप

नर्सिंग स्टाफ ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी तैयार करने से पहले उनकी समस्याओं को लेकर उनसे पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। नर्सों का कहना है कि पॉलिसी बनाने से पहले स्टेट यूनियन से भी बातचीत नहीं की गई।

नर्सिंग स्टाफ के मुताबिक उनकी ड्यूटी की प्रकृति अन्य विभागों से अलग है। 24 घंटे अस्पतालों में सेवाएं जारी रहती हैं और कर्मचारियों को अलग-अलग शिफ्ट में काम करना पड़ता है। ऐसे में ट्रांसफर पॉलिसी लागू करते समय नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी, आवागमन, सुरक्षा और पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना जरूरी है।

98 प्रतिशत महिला स्टाफ, दूर ट्रांसफर से सुरक्षा की चिंता

जिला प्रधान दीपा ने कहा कि नर्सिंग स्टाफ में करीब 98 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि यदि महिला नर्सों को उनके घर से काफी दूर तैनाती दी जाती है तो उन्हें ड्यूटी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है।

मॉर्निंग, इवनिंग और नाइट शिफ्ट में ड्यूटी होने के कारण खासकर रात के समय आने-जाने को लेकर सुरक्षा की चिंता बनी रहती है। नर्सों का कहना है कि दूर-दराज के स्थानों पर तैनाती का असर उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियों पर भी पड़ सकता है। इसलिए ट्रांसफर पॉलिसी को लागू करने से पहले इन सभी पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पूरी नहीं होने का आरोप

नर्सिंग स्टाफ ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद नर्सिंग स्टाफ की सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह लागू नहीं हुई हैं।

नर्सों का कहना है कि जब सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी तरह लागू नहीं हुई हैं, तो दूर-दराज के स्थानों पर तैनाती का फैसला उनकी परेशानी बढ़ा सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ट्रांसफर पॉलिसी पर दोबारा विचार किया जाए और नर्सिंग स्टाफ की वास्तविक समस्याओं को समझने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।

सरकार के खिलाफ नहीं, अधिकारों के लिए आंदोलन का दावा

नर्सिंग स्टाफ ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे अपने अधिकारों और सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को बंद करना और वर्दी भत्ता लागू करना शामिल है।

नर्सों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पहले भी सरकार और संबंधित अधिकारियों को पत्र दे चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है।

मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकाल तक बढ़ सकता है आंदोलन

नर्सिंग स्टाफ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को अनिश्चितकाल तक बढ़ाया जा सकता है। नर्सों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठाती रहेंगी।

फिलहाल प्रदेश भर में नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है। नर्सें ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी वापस लेने और वर्दी भत्ता लागू करने की मांग पर अड़ी हुई हैं। उनका कहना है कि सरकार को नर्सिंग स्टाफ की समस्याओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए समाधान निकालना चाहिए।

बाइट- दीपा, जिला प्रधान