NH-44 फ्लाईओवर धंसा, ट्रैफिक रोका गया, हादसे में ऑटो चालक घायल, NHAI से ऑडिट की मांग
NH-44 अलीपुर फ्लाईओवर का हिस्सा बारिश के बाद धँस गया। हादसे में एक ऑटो क्षतिग्रस्त हुआ और चालक घायल हुआ। दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक रोककर डायवर्जन लागू किया। NHAI से पोस्ट-मॉनसून ऑडिट और जवाबदेही तय करने की मांग उठी।
➤ NH-44 अलीपुर फ्लाईओवर का हिस्सा बारिश के बाद धँसा, ट्रैफिक रोका गया
➤ एक ऑटो क्षतिग्रस्त, चालक घायल; बड़ी जनहानि नहीं
➤ NHAI से पोस्ट-मॉनसून ऑडिट और जवाबदेही तय करने की मांग तेज
सुशील मोर
नई दिल्ली/सोनीपत, 4 सितंबर 2025 (सुशील मोर की रिपोर्ट) राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर हरियाणा–दिल्ली बॉर्डर के नज़दीक अलीपुर क्षेत्र में फ्लाईओवर का एक हिस्सा आज सुबह बारिश के बाद धँस गया/टूट गया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने मौके पर यातायात को तत्काल बंद कराया और वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट किया। शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी बड़ी जनहानि की खबर नहीं है, लेकिन एक ऑटो के क्षतिग्रस्त होने और चालक के घायल होने की सूचना आई है।
क्या हुआ, कहाँ हुआ
लगातार तेज़ बारिश के बीच अलिपुर थाना क्षेत्र में NH-44 के फ्लाईओवर का हिस्सा धँसने से सड़क पर बड़ा गड्ढा बन गया। घटनास्थल राजधानी सीमा (दिल्ली साइड) में पड़ता है। दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक को दोनों ओर से रोककर डायवर्जन लागू किया, ताकि किसी दूसरे वाहन को नुकसान न हो। मौके पर ट्रैफिक पुलिस, सिविल डिफेंस और राहत टीमें तैनात हैं।
बैकग्राउंड: यह फ्लाईओवर/सेक्शन कब और कितनी लागत से बना?
अलिपुर वाला यह सेगमेंट मुकर्बा चौक (दिल्ली) से पानीपत तक NH-44 के 8-लेन अपग्रेडेशन पैकेज का हिस्सा है। केंद्र सरकार ने इस करीब 70 किमी लंबे कॉरिडोर (मुकर्बा चौक किमी 15.500 से पानीपत किमी 86.000) को BOT (टोल) मोड पर स्वीकृत किया था, जिसकी अनुमानित लागत ₹2,204.51 करोड़ बताई गई थी (भूमि अधिग्रहण व R&R सहित)। परियोजना को NHAI के तहत लागू किया गया। बाद में इस परियोजना को पुनर्गठित कर अलग कंसैशनेयर के जरिए आगे बढ़ाया गया।
इसके अतिरिक्त, सरकारी एवं प्रोजेक्ट रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि मुकर्बा–पानीपत 8-लेन सेक्शन का बिड/प्रोजेक्ट-कॉस्ट और निष्पादन वर्षों में पुनर्संरचित हुआ; NHAI और संबंधित एजेंसियों के दस्तावेज़ इस सेक्शन की लम्बाई ~70 किमी और BOT टोल मॉडल की पुष्टि करते हैं।
सरकार–प्रशासन पर बड़े सवाल
1. ड्रेनेज डिजाइन और मेंटेनेंस: बरसात के साथ ही ढांचा धँसना डिटेल्ड ड्रेनेज, एप्रोच स्लैब कंपैक्शन और वाटर-प्रूफिंग पर सवाल उठाता है। क्या इस सेक्शन का प्री-मॉनसून/पोस्ट-मॉनसून स्ट्रक्चरल ऑडिट समय पर हुआ?
2. इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन: NHAI (सिविल/OM), दिल्ली पुलिस (ट्रैफिक), और आपदा प्रबंधन के बीच स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का प्रभावी क्रियान्वयन कितना तेज़ रहा? आज के डायवर्जन और चेतावनियाँ देर से तो नहीं आईं?
3. जन सुरक्षा और जवाबदेही: अलिपुर—मुकर्बा—सिंघू बॉर्डर कॉरीडोर पर हजारों कम्यूटर रोज़ाना निर्भर हैं। ऐसे में थर्ड-पार्टी स्ट्रक्चरल हेल्थ ऑडिट और दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।
मौके की स्थिति और ट्रैफिक व्यवस्था
यातायात बंद/डायवर्ट: पुलिस ने NH-44 के प्रभावित हिस्से को ‘ज़ीरो ट्रैफिक’ कर मुकर्बा चौक, आउटर रिंग रोड और रोड नं. 51 जैसे विकल्प सुझाए। भारी वाहनों को वैकल्पिक रूट लेने की सलाह।
बारिश और बाढ़ का दबाव: दिल्ली-NCR में तेज़ बारिश और यमुना का खतरे के निशान से ऊपर बहना सड़कों/फ्लाईओवरों पर अतिरिक्त दबाव बना रहा है।
प्रशासन/एजेंसियों के लिए तत्काल कदम (एडवाइजरी)
(1) आपात ‘कंडिशन सर्वे’: प्रभावित स्पैन, बियरिंग, एप्रोच एम्बैंकमेंट, जोड़ों (Expansion Joints) और ड्रेनेज की वीडियो-बोरोस्कोपी/जीपीआर जाँच।
(2) थर्ड-पार्टी टेक्निकल ऑडिट: IIT/NIT/CBRI जैसे संस्थानों से रैपिड सेफ्टी असेसमेंट।
(3) जल निकासी सुधार: डाउनटेक/हम्प, क्रैश-बैरीयर साइड वेप-होल्स की सफाई, पम्प-आउट ऑपरेशन और अस्थायी माइक्रो-पाइल/ग्राउटिंग जहाँ ज़रूरत हो।
(4) पारदर्शिता: इंसिडेंट रिपोर्ट 24–48 घंटे में सार्वजनिक करें—कॉन्ट्रैक्टर, O&M जिम्मेदारी, पिछली निरीक्षण-तारीखें, और रेकमेंडेशन सहित।
(5) ट्रैफिक कम्युनिकेशन: गूगल/मैप-एप्स पर रियल-टाइम डायवर्जन अपडेट, DTC/क्लस्टर बस रूट-टेम्परिंग और एम्बुलेंस/आपात सेवाओं के लिए ग्रीन-कॉरिडोर।
राजनीतिक/शासन कोण
दिल्ली सरकार और केंद्र (NHAI/भू-परिवहन मंत्रालय) दोनों के लिए यह घटना इन्फ्रास्ट्रक्चर गुणवत्ता और रख-रखाव पर बड़ा सवाल उठा रही है। वर्ष 2015 में स्वीकृत ₹2,204.51 करोड़ के 8-लेन प्रोजेक्ट के हिस्से में अगर बरसात के दबाव में ढांचा धँसता है, तो जिम्मेदारी तय कर ठोस दंडात्मक/सुधारात्मक कार्रवाई अपेक्षित है। साथ ही, UER-II (अलिपुर से शुरू) जैसे नए कॉरिडोरों के संचालन के बीच पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग सेक्शन की स्थिति पर भी सरकार को स्पष्ट रोडमैप देना चाहिए।
पाठकों/यात्रियों के लिए उपयोगी जानकारी
इस मार्ग से फिलहाल न जाएँ: सिंघू बॉर्डर—मॉडल टाउन/किंग्सवे कैंप दिशा में जाने वाले वाहन मुकर्बा चौक/आउटर रिंग रोड से रूट बदलें। रिवर्स दिशा के लिए रोड नं. 51—आज़ादपुर विकल्प रखा गया है। भारी/इंटरस्टेट ट्रैफिक को KMP/ईस्टर्न पेरिफेरल की ओर डायवर्ट किया गया है