हैरत: शादीशुदा लोग तीसरे पार्टनर संग लिव इन में रहने के लिए कर रहे आवेदन

यूसीसी लागू होने के बाद हरिद्वार में लिव इन रजिस्ट्रेशन के 40 से अधिक आवेदन मिले। इनमें 5 शादीशुदा लोगों के आवेदन प्रशासन ने नियमों के तहत खारिज किए।

हैरत: शादीशुदा लोग तीसरे पार्टनर संग लिव इन में रहने के लिए कर रहे आवेदन
  • उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद लिव-इन के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

  • हरिद्वार में 13 में से 5 आवेदन शादीशुदा लोगों द्वारा, प्रशासन ने खारिज किया

  • विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ता एक्स्ट्रा मैरिटल और साइलेंट डाइवोर्स बड़ा कारण



उत्तराखंड सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बाद प्रदेश में लिव इन रिलेशनशिप में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। शासन के इस नए नियम के तहत लोगों के आवेदन तेजी से प्राप्त हो रहे हैं। हरिद्वार में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के दौरान एक अलग ही रुझान देखने को मिला है। यहां न केवल अविवाहित प्रेमी जोड़े, बल्कि कुछ शादीशुदा लोग भी लिव इन में रहने के लिए आवेदन कर रहे हैं।

हरिद्वार तहसील में प्राप्त कुल 13 आवेदनों में से 5 आवेदन पहले से विवाहित लोगों द्वारा किए गए हैं। यह स्थिति प्रशासन के लिए चौंकाने वाली रही। एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि ऐसे सभी आवेदन नियमों के खिलाफ होने के कारण रद्द कर दिए गए हैं। वहीं दो सामान्य जोड़ों को अनुमति प्रदान की गई है। पूरे जिले की बात करें तो अब तक 40 से अधिक आवेदन लिव इन रजिस्ट्रेशन के लिए प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें 18 जोड़े बिना शादी साथ रह रहे हैं

विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रवृत्ति के पीछे एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, वैवाहिक तनाव और मानसिक दूरी जैसे कारण प्रमुख हैं। समाज में ऐसे रिश्तों का चलन पहले की तुलना में अधिक तेज हो गया है।

मैरिज काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट डॉ. मुकुल अग्रवाल बताते हैं कि कई दंपतियों के बीच विवाह के बाद मानसिक दूरी इतनी बढ़ जाती है कि वे रिश्ते में होते हुए भी साथ नहीं रहते। इस स्थिति को ‘साइलेंट डाइवोर्स’ कहा जाता है। ऐसे लोग अक्सर किसी तीसरे व्यक्ति के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं और समय आने पर लिव इन में रहने को प्राथमिकता देते हैं। हरिद्वार में शादीशुदा लोगों के ये आवेदन इसी स्थिति की ओर संकेत कर रहे हैं।