लेह में लद्दाख की राज्य की मांग पर बवाल, चार की मौत, प्रदर्शनकारियों ने भाजपा ऑफिस और CRPF की गाड़ी को लगाई आग
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर लेह में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने BJP ऑफिस और CRPF गाड़ी को आग लगा दी। सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ा और युवाओं से हिंसा रोकने की अपील की।
➤ लेह में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर प्रदर्शन हिंसक
➤ भाजपा ऑफिस और CRPF की गाड़ी को आग के हवाले, पुलिस पर पत्थरबाजी
➤ चार लोगों की मौत और 70 से अधिक घायल, प्रशासन ने लगाया बैन
लेह। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर बुधवार को लेह में बड़ा बवाल खड़ा हो गया। छात्रों और स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शन ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। पुलिस और सुरक्षाबलों से झड़प में चार लोगों की मौत हो गई और 70 से ज्यादा लोग घायल हुए। हालात बेकाबू होने पर प्रशासन ने लेह में बिना अनुमति रैली और प्रदर्शन पर तत्काल बैन लगा दिया।
प्रदर्शन के दौरान गुस्साए युवाओं ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। हालात इतने बिगड़े कि भीड़ ने भाजपा ऑफिस और सीआरपीएफ की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। सुरक्षाबलों ने भीड़ को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठियां चलाईं।
ये प्रदर्शनकारी सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में सड़कों पर उतरे थे। वांगचुक पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। जब उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो छात्रों ने बंद बुलाया। इसी दौरान भीड़ हिंसक हो गई।
हिंसा के बाद सोनम वांगचुक ने भावुक होते हुए अपना अनशन तोड़ दिया और कहा— "यह लद्दाख के लिए दुख का दिन है। हम पांच साल से शांति के रास्ते पर चल रहे थे। अनशन किया, लेह से दिल्ली तक पैदल चलकर गए। आज हम शांति के पैगाम को असफल होते हुए देख रहे हैं। हिंसा, गोलीबारी और आगजनी हो रही है। मैं लद्दाख की युवा पीढ़ी से अपील करता हूं कि इस बेवकूफी को बंद करें। हम अपना अनशन तोड़ रहे हैं और प्रदर्शन रोक रहे हैं।"
साल 2019 में जब अनुच्छेद 370 और 35A हटाए गए, तब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। उस समय सरकार ने भरोसा दिया था कि हालात सामान्य होने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है। इसी मांग को लेकर अब 6 अक्टूबर को दिल्ली में अगली बैठक बुलाई गई है।
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➤ लद्दाख में हिंसक प्रदर्शन, छात्रों की पुलिस और CRPF से झड़प
➤ भाजपा ऑफिस और सुरक्षाबलों की गाड़ी को लगाई आग, पत्थरबाजी में कई घायल
➤ सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन, युवाओं से अपील- हिंसा रोकें
लेह बुधवार को तब रणक्षेत्र बन गया जब लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर छात्रों और युवाओं का विरोध अचानक हिंसक प्रदर्शन में बदल गया। हजारों की भीड़ हिल काउंसिल दफ्तर के बाहर जमा हुई। शुरुआत में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस हुई, लेकिन देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की, सुरक्षाबलों की CRPF गाड़ी में आग लगा दी और पास ही स्थित भाजपा ऑफिस को आग के हवाले कर दिया। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की।
इस विरोध की अगुवाई सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थक कर रहे थे। वांगचुक पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। उन्होंने कहा था कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो लद्दाख में आंदोलन तेज होगा। बुधवार को हुई हिंसा के बाद वांगचुक ने बेहद भावुक शब्दों में कहा—
“यह लद्दाख के लिए दुख का दिन है। पांच साल से हम शांति के रास्ते पर चल रहे थे। आज हिंसा और आगजनी हो रही है। मैं युवाओं से अपील करता हूं कि इस बेवकूफी को बंद करें।”
वांगचुक ने इसके साथ ही अपना अनशन तोड़ने और आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब अगली बैठक 6 अक्टूबर को दिल्ली में होगी, जहां लद्दाख की मांगों पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
2019 में जब आर्टिकल 370 और 35A हटाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था, तब केंद्र सरकार ने वादा किया था कि हालात सामान्य होने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। लेकिन बीते पांच सालों में यह वादा पूरा नहीं हुआ। इसी को लेकर लद्दाख के लोग बार-बार विरोध जता रहे हैं।
स्थानीय लोग कहते हैं कि आर्टिकल 370 के हटने के बाद उनकी जमीन, नौकरियां और सांस्कृतिक पहचान को खतरा है। अब हिंसा के बाद माहौल और संवेदनशील हो गया है।
Akhil Mahajan