लद्दाख में उग्र आंदोलन के बीच सोनम वांगचुक NSA में गिरफ्तार

लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर आंदोलन उग्र हो गया है। लेह में चार मौतों के बाद पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को NSA के तहत गिरफ्तार कर लिया गया, इंटरनेट बंद और सुरक्षा बढ़ाई गई

लद्दाख में उग्र आंदोलन के बीच सोनम वांगचुक NSA में गिरफ्तार
  • लद्दाख में आंदोलन उग्र सोनम वांगचुक NSA में गिरफ्तार
  • लेह में झड़पों में चार की मौत इंटरनेट बंद सुरक्षा कड़ी
  • राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग केंद्र पर सवाल

लद्दाख में राज्य का दर्जा बहाल करने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष संरक्षण लागू करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को निर्णायक और तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया। इस बीच प्रतिष्ठित पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी ने न सिर्फ आंदोलन की तीव्रता बढ़ा दी, बल्कि क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में भी उथल-पुथल मचा दी है

गुरुवार को हुए बंद और विरोध प्रदर्शनों के दौरान लेह में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं, जिनमें चार लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने शुक्रवार को पूरे लेह में इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दीं और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। सूत्रों के अनुसार, दोपहर 2:30 बजे लद्दाख पुलिस प्रमुख एस.डी. सिंह जम्वाल की निगरानी में वांगचुक को उनके आवास से हिरासत में लिया गया

स्थानीय संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार से लद्दाख को राज्य का दर्जा बहाल करने और छठी अनुसूची लागू करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। आंदोलन का नेतृत्व वर्षों से वांगचुक लेह एपेक्स बॉडी और कर्गिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ मिलकर कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक मांग नहीं बल्कि लद्दाख की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक सुरक्षा का प्रश्न है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने से नाराज़गी गहराती जा रही है

गिरफ्तारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए केंद्र पर गंभीर सवाल उठाए। वहीं गृह मंत्रालय ने इस हिंसा के लिए सीधे तौर पर सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, उन पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। उधर, समर्थकों का कहना है कि वांगचुक ने खुद हिंसा की निंदा की थी और हाल ही में अपना 15 दिन का अनशन समाप्त किया था, जिससे उनका नाम इस तरह जोड़े जाने पर कई लोग हैरानी जता रहे हैं

वर्तमान स्थिति में लेह और आसपास के क्षेत्रों में तनाव गहरा है। प्रशासन और आंदोलनकारी संगठनों के बीच संवाद टूटने की स्थिति दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह गतिरोध जल्द नहीं टूटा, तो लद्दाख में आंदोलन और व्यापक स्वरूप ले सकता है, जिसका असर केंद्र-शासित क्षेत्र की स्थिरता और विकास पर गहराई से पड़ेगा