केदारनाथ हेली सेवाओं पर डिजिटल निगरानी लागू, हादसों के बाद सरकार सख्त

केदारनाथ यात्रा के दौरान हेली सेवाओं को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू करेगी, जिसमें कैमरे और सेलोमीटर लगाए जाएंगे।

केदारनाथ हेली सेवाओं पर डिजिटल निगरानी लागू, हादसों के बाद सरकार सख्त

हेली सेवाओं की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम लागू होगा
हेलीकॉप्टरों में कैमरे और हेलीपैड पर सेलोमीटर लगाए जाएंगे
पिछले हादसों के बाद सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर



देहरादून। उत्तराखंड सरकार इस वर्ष केदारनाथ यात्रा के दौरान हेली सेवाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़े स्तर पर तकनीकी बदलाव करने जा रही है। इसके तहत उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) द्वारा डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे हवाई सेवाओं की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की लापरवाही या जोखिम को समय रहते रोकना है।

इस नई व्यवस्था के अंतर्गत हेलीपैड पर आधुनिक उपकरण सेलोमीटर लगाए जाएंगे, जो बादलों की ऊंचाई और मौसम की सटीक जानकारी देने में सक्षम होंगे। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है और कम दृश्यता के कारण हेली सेवाओं में जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में यह उपकरण पायलटों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा और उड़ानों को सुरक्षित बनाएगा।

इसके साथ ही सरकार हेलीकॉप्टरों में कैमरे लगाने की योजना पर भी काम कर रही है। इन कैमरों के जरिए उड़ानों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। इसके अलावा चारधाम यात्रा के लिए संचालित चार्टर हेली सेवाओं में भी कैमरों के उपयोग पर विचार किया जा रहा है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियंत्रित रहे।

दरअसल, चारधाम यात्रा के दौरान हेली सेवाओं की मांग में भारी वृद्धि होती है। विशेष रूप से केदारनाथ धाम के लिए नियमित शटल सेवाएं चलाई जाती हैं, जबकि देहरादून से बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए चार्टर सेवाओं का संचालन किया जाता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की अनिश्चितता के चलते इन सेवाओं की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।

पिछले वर्ष चारधाम यात्रा के पहले चरण में पांच हेली दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें कुल 13 लोगों की जान चली गई थी। प्रारंभिक जांच में खराब मौसम, घने बादल, कम दृश्यता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को इन हादसों का प्रमुख कारण माना गया था। इन घटनाओं के बाद सरकार ने तकनीकी सुधार और निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

सरकार का मानना है कि डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू होने से न केवल हेली सेवाओं की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि यात्रियों का भरोसा भी बढ़ेगा। साथ ही इससे चारधाम यात्रा को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।