CBI पूछताछ से पहले अकाउंट ऑफिसर ने 8वीं मंजिल से लगाई छलांग

हरियाणा सचिवालय सुसाइड केस में पुलिस ने 3 अधिकारियों पर FIR दर्ज की है। अकाउंट ऑफिसर बलवंत सिंह ने CBI पूछताछ से पहले आत्महत्या की थी।

CBI पूछताछ से पहले अकाउंट ऑफिसर ने 8वीं मंजिल से लगाई छलांग

हरियाणा सचिवालय सुसाइड केस में 3 अधिकारियों पर FIR दर्ज

CBI पूछताछ से पहले अकाउंट ऑफिसर ने 8वीं मंजिल से लगाई छलांग

₹590 करोड़ बैंक घोटाले में पहले से जेल में बंद है पूर्व CFO अमित दीवान

चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सचिवालय में अकाउंट ऑफिसर बलवंत सिंह द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने मृतक की पत्नी की शिकायत पर हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के पूर्व CFO अमित दीवान, आशीष गोगिया और राजेश के खिलाफ केस दर्ज किया है। तीनों पर बलवंत सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस के अनुसार, इस मामले की जांच जारी है। जांच अधिकारी विवेक शर्मा ने बताया कि मृतक के परिवार के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

बताया गया है कि अमित दीवान पहले से ही ₹590 करोड़ IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में अंबाला सेंट्रल जेल में बंद है। इसी मामले में सोमवार को CBI ने बलवंत सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालांकि पूछताछ से पहले ही उन्होंने सचिवालय की इमारत से कूदकर जान दे दी।

बलवंत सिंह मूल रूप से झज्जर जिले के मुंडाहेड़ा गांव के रहने वाले थे। वर्ष 2007 में उनकी बिजली निगम में नौकरी लगी थी। उनके परिवार में पत्नी प्रमिला देवी, दो बेटियां और एक बेटा है। परिवार लंबे समय से पंचकूला के पास बलटाना के एकता विहार में रह रहा था।

सोमवार सुबह बलवंत सिंह विजिटर पास बनवाकर हरियाणा सचिवालय पहुंचे थे। रिकॉर्ड के मुताबिक उनका पास सुबह 9:42 बजे जनरेट हुआ था। उन्होंने पांचवीं मंजिल स्थित कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स कार्यालय में आधिकारिक कार्य से आने की बात लिखी थी। सचिवालय में उनकी एंट्री सुबह 10:22 बजे दर्ज हुई।

पुलिस जांच में सामने आया है कि बलवंत सिंह दोपहर करीब 2:50 बजे तक सचिवालय की पांचवीं से आठवीं मंजिल के बीच घूमते रहे। इसके बाद करीब 3 बजे उन्होंने आठवीं मंजिल से छलांग लगा दी। मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद पुलिस ने उनका मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया है। अब अंतिम कॉल, मैसेज और डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है, जिससे मामले में कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

जांच में सामने आया है कि IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में गलत तरीके से खाते खोलकर करोड़ों रुपए ट्रांसफर किए गए थे। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर बैंक खाते खोले गए और फर्जी एफडीआर तैयार की गईं। इस पूरे मामले में बैंक अधिकारियों और HPGCL अधिकारियों की मिलीभगत की बात सामने आई थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक रिश्वत के तौर पर करीब 50 लाख रुपए लेने की बात भी सामने आई है।