केंद्र ने विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी: जेपी नड्डा, कांग्रेस सरकार अवसर गंवा रही

जेपी नड्डा ने शिमला में प्रेस वार्ता के दौरान दावा किया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल के विकास के लिए रिकॉर्ड सहायता दी, लेकिन कांग्रेस सरकार अवसरों को उपलब्धियों में बदलने में विफल रही।

केंद्र ने विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी: जेपी नड्डा, कांग्रेस सरकार अवसर गंवा रही

जेपी नड्डा ने कहा, केंद्र ने हिमाचल के विकास के लिए रिकॉर्ड वित्तीय सहायता दी

कांग्रेस सरकार पर योजनाओं के क्रियान्वयन में विफल रहने का आरोप लगाया

बल्क ड्रग पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजनाओं में देरी को बड़ा नुकसान बताया


केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर विकास कार्यों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए संसाधनों और वित्तीय सहायता में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन प्रदेश सरकार इन अवसरों को जनहित की उपलब्धियों में बदलने में असफल रही है।

नड्डा ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को आपदा प्रबंधन, सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए रिकॉर्ड सहायता उपलब्ध कराई है। उन्होंने दावा किया कि हालिया पंचायत और नगर निकाय चुनावों में भाजपा को मिले जनसमर्थन से प्रदेश सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी भी स्पष्ट हुई है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश को विशेष सहायता योजना के तहत 2,381 करोड़ रुपए, एनडीआरएफ के माध्यम से 2,006 करोड़ रुपए और बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 2,150 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता प्रदान की गई। इसके अलावा प्रदेश में 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जबकि रेलवे क्षेत्र में रिकॉर्ड 2,911 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एम्स बिलासपुर, आईआईएम सिरमौर, आईआईआईटी ऊना, स्मार्ट सिटी मिशन, रेणुका जी बांध और लुहरी जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े विकास कार्य केंद्र सरकार की हिमाचल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि एम्स बिलासपुर, मेडिकल कॉलेजों, पीजीआई सैटेलाइट सेंटर और आईजीएमसी शिमला के लिए हजारों करोड़ रुपए की सहायता दी गई है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रदेश सरकार पिछड़ गई है। उनके अनुसार पीएम-एबीएचआईएम योजना के तहत स्वीकृत 15 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से केवल एक ही पूरा हो पाया है, जबकि 12 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में भी सिर्फ एक तैयार हुई है।

नड्डा ने बल्क ड्रग पार्क परियोजना को लेकर भी कांग्रेस सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2022 में केंद्र सरकार ने परियोजना को मंजूरी दे दी थी, लेकिन पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने में करीब तीन साल लग गए। इससे प्रदेश निवेश और रोजगार के बड़े अवसरों से वंचित रह गया।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपए की सहायता स्वीकृत की थी और 225 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए थे, लेकिन राज्य सरकार केवल 102.13 करोड़ रुपए ही खर्च कर सकी।

मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजना का उल्लेख करते हुए नड्डा ने कहा कि फरवरी 2022 में स्वीकृत इस परियोजना से हिमाचल चिकित्सा उपकरण निर्माण का बड़ा केंद्र बन सकता था। लेकिन अक्टूबर 2024 में राज्य सरकार के पीछे हटने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी और केंद्र द्वारा जारी 30 करोड़ रुपए की पहली किस्त भी वापस करनी पड़ी।

प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले "व्यवस्था परिवर्तन" का वादा किया था, लेकिन वर्तमान में प्रशासनिक अव्यवस्था और निर्णयहीनता का माहौल दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण पद अतिरिक्त प्रभार के सहारे चल रहे हैं और प्रभावी नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही है।

नड्डा ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज हो चुका है। उन्होंने कहा कि जनता अब घोषणाओं के बजाय परिणाम चाहती है और विकास कार्यों में जवाबदेही की अपेक्षा कर रही है।

उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार भविष्य में भी हिमाचल प्रदेश के विकास और समृद्धि के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी। साथ ही कहा कि प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि केंद्र से मिली व्यापक सहायता के बावजूद अपेक्षित परिणाम क्यों दिखाई नहीं दे रहे हैं।