बछड़े को बचाने उतरे चार जिंदगियां बुझीं: कुएं में दम घुटने से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत, ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

झज्जर के मुनीमपुर गांव में बछड़े को बचाने के दौरान कुएं में उतरे चार लोगों की दम घुटने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने रेस्क्यू में देरी और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाए, जबकि पुलिस ने जांच का आश्वासन दिया।

बछड़े को बचाने उतरे चार जिंदगियां बुझीं:  कुएं में दम घुटने से  एक ही परिवार के चार लोगों की मौत, ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

बछड़े को बचाने उतरे चार लोगों की जहरीली गैस से मौत

ग्रामीण बोले- तीन घंटे तक नहीं पहुंचा प्रभावी रेस्क्यू, चारों जिंदा थे

प्रशासन ने आरोपों की जांच की बात कही, गांव में भारी आक्रोश


हरियाणा के झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में रविवार रात एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। एक गाय के बछड़े को बचाने के प्रयास में चार लोगों की पुराने दलदली कुएं में दम घुटने से मौत हो गई। मृतकों में तीन लोग एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं। घटना के बाद गांव में मातम के साथ-साथ प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद समय पर प्रभावी बचाव अभियान शुरू नहीं किया गया, जबकि पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंच गई थी और लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी।

झज्जर में कुए में फंसे चारों व्यक्तियों को निकालने के लिए जेसीबी बुलाई गई। मशीन से कुएं को तोड़कर गड्ढा बनाया गया था।

बछड़े की आवाज सुनकर एक-एक कर कुएं में उतरे चार लोग

ग्रामीणों के अनुसार रविवार रात करीब 8 बजे गांव के पुराने कुएं से बछड़े के रंभाने की आवाज सुनाई दी। बछड़े को बाहर निकालने के लिए पहले एक व्यक्ति कुएं में उतरा, लेकिन अंदर मौजूद संभावित जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गया। उसे बचाने के लिए दूसरा, तीसरा और चौथा व्यक्ति भी एक-एक कर नीचे उतरा, लेकिन सभी गैस की चपेट में आ गए और कुएं में ही फंस गए।

मृतकों की पहचान दलबीर (41), नरेंद्र (37), मोनू और प्रवासी मजदूर रामे (34) के रूप में हुई है।

ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने खुद कुएं में जाकर फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला।

प्रत्यक्षदर्शी का दावा- नीचे मत आना, यहां सांस नहीं आ रही

मृतकों के भतीजे सुनील ने बताया कि जब वह मौके पर पहुंचे तो कुएं के अंदर से बचाओ-बचाओ की आवाजें आ रही थीं। उन्होंने नीचे उतरने की कोशिश की तो अंदर फंसे नरेंद्र ने चिल्लाकर कहा कि "नीचे मत आना, यहां सांस नहीं आ रही।" इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस और अन्य बचाव एजेंसियों को सूचना दी।

ग्रामीणों का आरोप- तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा

गांव के लोगों का कहना है कि रात करीब 8 बजे पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस को सूचना दे दी गई थी, लेकिन काफी देर तक प्रभावी राहत कार्य शुरू नहीं हुआ। उनका आरोप है कि मजबूर होकर गांव वालों ने ही निजी संसाधनों की मदद से बचाव अभियान शुरू किया।

ग्रामीणों के अनुसार पहले सेप्टिक टैंक की मदद से कुएं का पानी कम किया गया। इसके बाद जेसीबी से कुएं की दीवार का हिस्सा तोड़ा गया ताकि अंदर भरी गैस बाहर निकल सके। देर रात फायर ब्रिगेड के मास्क पहनकर गांव के लोग खुद कुएं में उतरे और करीब साढ़े तीन घंटे बाद चारों को बाहर निकाला।

इलाज के लिए चारों को पास के सिविल अस्पताल लेकर जाते हुए लोग।

ऑक्सीजन और एंबुलेंस व्यवस्था पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मौके पर पहुंची एंबुलेंस में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उनका दावा है कि जब चारों लोगों को बाहर निकाला गया तब उनमें जीवन के संकेत मौजूद थे। समय पर ऑक्सीजन और बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलती तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। एक व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के लिए पुलिस की पीसीआर का सहारा लेना पड़ा। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया।

पुलिस का पक्ष

पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंच गई थी। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए देरी और लापरवाही के आरोपों की जांच कराई जाएगी। प्रशासन ने पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

गांव में फूटा गुस्सा, अधिकारियों को सुनाई खरी-खोटी

घटना के बाद पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह गांव और अस्पताल पहुंचीं। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रभावी रेस्क्यू शुरू होता तो चारों लोगों की जान बच सकती थी। लोगों ने अधिकारियों के सामने अपना विरोध दर्ज कराया और मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

पोस्टमॉर्टम से पहले पंचायत करेगी फैसला

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि चारों शवों का पोस्टमॉर्टम कराने से पहले गांव में बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस दौरान क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से भी न्याय दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।