युद्ध की आग में झुलसा मध्य-पूर्व: ईरान के रक्षा मंत्री और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर , 51 छात्राओं समेत 56 की मौत, भारत की चिंताएं बढ़ी

अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त बमबारी में ईरान के कई शहरों पर हमले हुए हैं। 51 छात्राओं समेत 54 लोगों की मौत की खबर है, जबकि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पलटवार किया है।

युद्ध की आग में झुलसा मध्य-पूर्व:  ईरान के रक्षा मंत्री और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर , 51 छात्राओं समेत  56 की मौत,  भारत की चिंताएं बढ़ी

■ अमेरिका–इस्राइल की संयुक्त कार्रवाई, ईरान के कई शहरों पर हवाई हमले
■ तेहरान में खामेनेई के कार्यालय के पास भी विस्फोट की खबर
■ पलटवार में ईरान ने 5 देशों में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना


पश्चिम एशिया में तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इस्राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के कई शहरों पर हवाई हमले किए हैं। रॉयटर्स ने दावा किया है कि इजराइली हमलों में ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नासिरजादेह और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पाकपोर मारे गए हैं। जानकारी के अनुसार मौतों का आंंकड़ा काफी अधिक हो सकता है। अबू धाबी में ईरानी हमले के बाद का यह फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल है।

ईरान की राजधानी तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के कार्यालय के पास भी विस्फोट की खबर सामने आई है। हमलों के बाद शहर में अफरातफरी का माहौल है और कई इलाकों में आपात स्थिति लागू कर दी गई है। बमबारी के बीच अब तक 53 छात्राओं समेत 56 की मौत की पुष्टि हुई है।

कतर में ईरानी मिसाइल हमले के दौरान का फुटेज।

इस्राइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के सामरिक ठिकानों और सैन्य ढांचे को निशाना बनाया है। वहीं, ईरान ने इसे खुला युद्ध करार देते हुए पलटवार की कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरानी मीडिया के अनुसार, पांच देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष यदि लंबा खिंचता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और वैश्विक कूटनीति पर पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने तत्काल संयम बरतने की अपील की है।

.ईरान-अमेरिका युद्ध: अब तक का घटनाक्रम और नुकसान

  • ईरान के मिनाब में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले में कम से कम 51 छात्राओं की मौत हो गई है और 60 से अधिक घायल हैं

  • तेहरान में राष्ट्रपति भवन और सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई के परिसर के पास भीषण धमाके हुए हैं

  • ईरान के पलटवार में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी में मिसाइल गिरने से एक नागरिक की मौत हुई है

  • सीरिया के सुवायदा में हुए हमलों में 4 लोग मारे गए और कई घायल हुए हैं

  • इस युद्ध से पहले जनवरी 2026 में हुए आंतरिक विद्रोह और सरकारी दमन में भी 7,000 से 36,500 लोगों के मारे जाने का अनुमान है

ईरान पर हमले की क्या है असली वजह?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सैन्य अभियान की घोषणा करते हुए कई कारण गिनाए हैं:

  • परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका का दावा है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है और वार्ता में सहयोग नहीं कर रहा है।

  • मिसाइल खतरा: ट्रम्प के अनुसार ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमता अमेरिका, यूरोप और उसके सहयोगियों के लिए सीधा खतरा बन गई है।

  • मानवाधिकार और आंतरिक अशांति: ईरान में 2025 के अंत से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों और उसमें हुई मौतों (अनुमानतः 32,000) को भी अमेरिका ने सैन्य हस्तक्षेप का आधार बनाया है।

  • सत्ता परिवर्तन: ट्रम्प ने ईरानी जनता से आह्वान किया है कि वे वर्तमान नेतृत्व को उखाड़ फेंकें और अपनी आज़ादी सुनिश्चित करें।

इराक का क्या है स्टैंड और अमेरिका क्यों दे रहा साथ?

इराक की स्थिति इस संघर्ष में काफी जटिल है:

  • इराक की मजबूरी: इराक ने अपनी हवाई सीमा (airspace) सुरक्षा कारणों से बंद कर दी है。 हालांकि इराक सरकार ने ईरान पर हमलों की निंदा की है, लेकिन उसके क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने उसे अनचाहे तरीके से इस युद्ध का हिस्सा बना रहे हैं。

  • अमेरिका की रणनीति: अमेरिका इराक का साथ इसलिए दे रहा है ताकि वह मध्य-पूर्व में अपने प्रभाव को बनाए रख सके और ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों (Proxies) को खत्म कर सके जो इराक में अमेरिकी सेना को निशाना बनाते रहे हैं।

भारत पर इस युद्ध का क्या पड़ेगा असर?

भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि:

  • तेल की आपूर्ति और महंगाई: भारत अपनी जरूरत का लगभग दो-तिहाई कच्चा तेल और आधा एलएनजी (LNG) हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है。 अगर यह रास्ता बंद होता है, तो भारत में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और महंगाई बढ़ सकती है।

  • रणनीतिक संतुलन: भारत के संबंध इजरायल और ईरान दोनों से अच्छे हैं। इस युद्ध के कारण भारत को एक कठिन कूटनीतिक संतुलन बनाना पड़ेगा।

  • नौसेना की सक्रियता: 2019 के तनाव की तरह, भारत को अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना के युद्धपोत तैनात करने पड़ सकते हैं।