एशियन गेम्स में हरियाणा की छोरियों ने गाढ़े झंडे, दीपिका ने दागे 11 गोल, मनीषा का कबड्डी में जलवा
एशियन गेम्स में हिसार के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, दीपिका सहरावत ने 11 गोल किए, मनीषा ने कबड्डी में लेफ्ट कवर संभाला और संजय ने हाकी में प्रभाव छोड़ा।
➤ दीपिका सहरावत ने एशियन गेम्स में अब तक 11 गोल किए
➤ मनीषा ने कबड्डी में लेफ्ट कवर की जिम्मेदारी संभाली
➤ संजय कालीरावण के प्रदर्शन से डाबड़ा गांव में खुशी का माहौल
हिसार। एशियन गेम्स में हिसार के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। भारतीय महिला हाकी टीम की खिलाड़ी दीपिका सहरावत ने उज्बेकिस्तान के खिलाफ एक ही मुकाबले में आठ गोल दागकर अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद इंडोनेशिया के खिलाफ लगातार दूसरे मैच में तीन गोल करते हुए उन्होंने हैट्रिक लगाई। इस तरह दीपिका टूर्नामेंट में अब तक 11 गोल कर सबसे आगे चल रही हैं। दूसरी ओर भारतीय कबड्डी टीम ने सोमवार को अपने अभियान की शुरुआत बांग्लादेश को 42-21 से हराकर की। इस मुकाबले में हिसार के गांव भिवानी रोहिल्ला की मनीषा ने लेफ्ट कवर से डिफेंडर की भूमिका निभाई। हसनगढ़ की निकिता नैन भी भारतीय टीम का हिस्सा हैं। वहीं गांव डाबड़ा के रहने वाले भारतीय हाकी खिलाड़ी संजय कालीरावण ने भी पहले मुकाबले में अपने प्रदर्शन से गांव का नाम रोशन किया।
दीपिका ने आठ गोल कर पीछे छोड़ा अपना ही रिकॉर्ड
भारतीय महिला हाकी टीम ने उज्बेकिस्तान को 19-0 से हराया था। इस मुकाबले में दीपिका सहरावत ने अकेले आठ गोल दागे। उनके इस प्रदर्शन ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। आठ गोल करने के साथ ही उन्होंने अपना ही पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।
इससे पहले दीपिका ने वर्ष 2024 में थाईलैंड के खिलाफ पांच गोल किए थे। इसके बाद इंडोनेशिया के खिलाफ भी उन्होंने तीन गोल कर लगातार दूसरे मैच में हैट्रिक लगाई।
दीपिका ने बताया कि उज्बेकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में शुरुआती तीन-चार गोल तक उन्हें अपने स्कोर का अंदाजा था, लेकिन इसके बाद उनका पूरा ध्यान खेल पर चला गया। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें खुद पता नहीं चल रहा था कि वह कितने गोल कर चुकी हैं। मैच समाप्त होने के बाद जब उन्हें आठ गोल करने की जानकारी मिली तो उन्हें काफी खुशी हुई।
दीपिका ने इस उपलब्धि का श्रेय पूरी टीम के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड बनाने की खुशी है, लेकिन फिलहाल उनका लक्ष्य गोल्ड मेडल हासिल करना है। वह आगे के मुकाबलों में भी टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगी।
दीपिका ने बताया कि उनके पिता ने हमेशा उन्हें हार नहीं मानने की सीख दी है। मैदान पर उतरते समय यही बात उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है। एशिया कप से पहले चोट के कारण दीपिका करीब आठ महीने तक हाकी से दूर भी रही थीं।
गांव से शुरू हुआ मनीषा का कबड्डी सफर
भारतीय कबड्डी टीम में शामिल भिवानी रोहिल्ला की मनीषा ने गांव से अपने खेल सफर की शुरुआत की। उनके पिता राजपाल ने बताया कि मनीषा ने वर्ष 2017 में गांव से ही कबड्डी का अभ्यास शुरू किया था।
राजपाल खेतीबाड़ी करते हैं। परिवार में मनीषा समेत छह भाई-बहन हैं। मनीषा ने चीन में आयोजित बीच कबड्डी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। इसके अलावा वह राष्ट्रीय स्तर पर भी गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।
एशियन गेम्स में भारतीय कबड्डी टीम के अभियान की शुरुआत बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले से हुई। टीम ने इस मैच में 42-21 से जीत दर्ज की। मनीषा ने मुकाबले में लेफ्ट कवर से डिफेंडर की भूमिका निभाई।
निकिता को पहले मुकाबले में नहीं मिला मौका
हसनगढ़ की निकिता नैन भी भारतीय सीनियर कबड्डी टीम में शामिल हैं। हालांकि बांग्लादेश के खिलाफ पहले मुकाबले में उन्हें प्लेइंग-7 में जगह नहीं मिली।
उनके कोच संदीप ने बताया कि आगामी मुकाबले में निकिता को मैदान पर उतरने का मौका मिलने की उम्मीद है। कोच के अनुसार निकिता ने महज आठ साल की उम्र में हसनगढ़ के सरकारी स्कूल में कबड्डी का अभ्यास शुरू किया था।
निकिता अंडर-18 स्तर पर भारतीय टीम की कप्तानी भी कर चुकी हैं। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने गोल्ड मेडल जीता था। अंडर-18 स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के दम पर निकिता ने सीनियर भारतीय टीम में जगह बनाई।
निकिता के पिता अनिल कुमार किसान हैं। वह सात भाई-बहनों में से एक हैं और उनकी दो बहनें भी कबड्डी खेलती हैं।
संजय कालीरावण के प्रदर्शन से डाबड़ा में खुशी
गांव डाबड़ा के रहने वाले भारतीय हाकी खिलाड़ी संजय कालीरावण ने भी एशियन गेम्स के पहले मुकाबले में इंडोनेशिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच में कई बेहतरीन पास देकर टीम के खेल में योगदान दिया।
अब भारतीय टीम मंगलवार को श्रीलंका के खिलाफ मुकाबला खेलेगी। संजय के प्रदर्शन को लेकर उनके गांव डाबड़ा में खासा उत्साह है। उनके कोच राजेंद्र सिहाग ने बताया कि संजय के मैच को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह रहा।
मुकाबले के बाद ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और लड्डू बांटकर खुशी मनाई। कोच राजेंद्र सिहाग ने बताया कि संजय ने महज सात साल की उम्र में उनके पास हाकी खेलना शुरू किया था। गांव के कच्चे मैदान पर ही संजय को हाकी की शुरुआती बारीकियां सिखाई गईं।
Akhil Mahajan