हरियाणा में 3 IPS समेत 10 पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही के आदेश, FIR दर्ज करने में 8 माह की देरी

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंचकूला केस में FIR दर्ज करने में 8 माह की देरी पर पुलिस को फटकार लगाई है। कोर्ट ने 3 आईपीएस सहित 10 अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए, जबकि DCP सृष्टि गुप्ता को राहत दी गई।

हरियाणा में 3 IPS समेत 10 पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही के आदेश, FIR दर्ज करने में 8 माह की देरी

➤ हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने में 8 माह की देरी पर पुलिस को फटकार लगाई
➤ 3 आईपीएस सहित 10 पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश
➤ मामला पंचकूला से जुड़ा, ED छापे के बाद 1 करोड़ की मांग का आरोप

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस को गंभीर फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी शिकायत पर कार्रवाई किए बिना उसे आठ महीने तक लंबित रखना कानून के शासनादेश का उल्लंघन और उसका अपमान है। जस्टिस सुमीत गोयल ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए हरियाणा के 10 पुलिस अधिकारियों, जिनमें 3 आईपीएस भी शामिल हैं, के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता जताई।

यह पूरा मामला पंचकूला का है, जो एक साल पुराना है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 23 जनवरी 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा उसके घर पर छापेमारी के बाद एक विधायक के पीए समेत दो लोगों ने उनसे संपर्क किया। आरोपियों ने कहा कि यदि वह एक करोड़ रुपये का भुगतान करता है, तो ईडी की कार्रवाई रुकवा दी जाएगी। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि विधायक कुलवंत सिंह की उपस्थिति में समझौते पर चर्चा शुरू हुई और उनके कहने पर ही पीए ने शिकायतकर्ता से संपर्क साधा।

शिकायत के आधार पर पुलिस को 23 अक्टूबर 2024 को कार्रवाई करनी थी, लेकिन एफआईआर दर्ज करने में आठ माह की देरी हुई। इसके बाद 19 जून को चंडीमंदिर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ और आईपीसी की धारा 406 व 420 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। आरोपियों ने अग्रिम जमानत की मांग की, जिस पर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया।

जस्टिस गोयल ने कहा कि यह अदालत पुलिस अधिकारियों के पास शिकायत को इतनी लंबी अवधि तक लंबित रहने की अनदेखी नहीं कर सकती। हालांकि, पंचकूला की वर्तमान डीसीपी सृष्टि गुप्ता को राहत दी गई, क्योंकि उन्होंने 4 जून को कार्यभार संभालते ही 15 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज कर दी थी।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि इस मामले पर एक अलग याचिका दर्ज की जाए और इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए ताकि पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो सके और उचित कार्रवाई की जा सके।