झगड़े में पति का 'जा, मर जा' कहना क्राइम है या नहीं? हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

ख्हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक बहस में गुस्से में बोले ‘जा, मर जा’ जैसे शब्द धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं हैं

झगड़े में पति का 'जा, मर जा' कहना क्राइम है या नहीं? हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
  • ‘जा, मर जा’ बोलना आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं
  • धारा 306 लगाने के लिए आरोपी की मंशा साबित होना जरूरी
  • गुस्से में कही बात को अपराध नहीं माना जाएगा


क्या गुस्से में बोला गया एक वाक्य किसी को जेल भेज सकता है? केरल हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों से जुड़े एक मामले में कानून की स्पष्ट और सख्त रेखा खींच दी है। अदालत ने कहा कि बहस के दौरान कहे गए ‘जा, मर जा’ जैसे शब्द अपने-आप में भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माने जा सकते।

हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि धारा 306 के तहत अपराध तभी बनता है, जब यह साफ तौर पर साबित हो कि आरोपी का इरादा पीड़ित को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का था। केवल क्षणिक आवेश, मौखिक बहस या गुस्से में कहे गए शब्द इस अपराध की कसौटी पर खरे नहीं उतरते।

मामला 15 सितंबर 2023 का है। अभियोजन के अनुसार, पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद को लेकर तीखी बहस हुई थी। इसके बाद पुलिस ने पति के खिलाफ मामला दर्ज किया। सत्र न्यायालय ने आरोपी की बरी होने की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट का रुख किया।

केरल हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इरादे का अभाव, आवेश में कही बात, और सक्रिय उकसावे की कमी—इन परिस्थितियों में धारा 306 लागू नहीं होती। अदालत ने माना कि इस प्रकरण में आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बनता, इसलिए सत्र न्यायालय का आरोप तय करने का आदेश रद्द कर दिया गया।