हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में VC का खुला विरोध, काले कपड़ों में छात्रों ने बहिष्कार किया भाषण
हिसार स्थित हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में युवा उत्सव के दौरान छात्रों ने कुलपति के भाषण का बहिष्कार किया। काले कपड़े पहनकर पोस्टर लहराए और न्याय की मांग की।
➤ युवा उत्सव में कुलपति के भाषण का छात्रों ने किया बहिष्कार
➤ काले कपड़े पहन पोस्टर लहराए, वी वांट जस्टिस के नारे
➤ सिर झुकाकर पूरा भाषण पढ़ते रहे VC, बिना रुके लौटे
हरियाणा के हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। मंगलवार को आयोजित युवा उत्सव के दौरान विश्वविद्यालय के छात्रों ने कुलपति के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए उनके भाषण का बहिष्कार कर दिया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में छात्र काले कपड़े पहनकर पहुंचे और हाथों में पोस्टर लेकर कुलपति के खिलाफ नारेबाजी की। हालात ऐसे बन गए कि कुलपति को सिर झुकाकर ही पूरा भाषण पढ़ना पड़ा और कार्यक्रम समाप्त होते ही वे जल्दबाजी में वहां से चले गए।
कार्यक्रम के दौरान जैसे ही कुलपति मंच पर भाषण देने पहुंचे, छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। छात्र वी वांट जस्टिस के नारे लगाते रहे और पोस्टर लहराते रहे, जिनमें छात्राओं पर शोषण, छात्रों पर लाठीचार्ज, चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की बहाली, विद्यार्थियों पर दर्ज कथित फर्जी केस, और डिविजनल कमिश्नर की रिपोर्ट लागू न होने जैसे गंभीर मुद्दे लिखे हुए थे। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार इन मामलों को नजरअंदाज कर रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध इतना तीखा था कि कुलपति ने छात्रों की ओर देखना तक उचित नहीं समझा और सिर झुकाकर अपना भाषण पढ़ते रहे। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र कार्यक्रम स्थल से उठकर बाहर चले गए, जिससे कुलपति के सामने मैदान लगभग खाली नजर आया। वहीं कुछ छात्र दीवार के पास खड़े होकर पोस्टर लहराते रहे।
युवा उत्सव के दौरान मौके पर मौजूद फैकल्टी सदस्य छात्रों को समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे और नारेबाजी जारी रखी। कुलपति के कार्यक्रम से चले जाने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है और छात्रों की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल किया जा रहा है।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपना आंदोलन और तेज और व्यापक करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Akhil Mahajan