BJP नेता के भाई पर फायरिंग, SIT बनाने की तैयारी
पंचकूला में भाजपा पार्षद के देवर रतन लुबाना पर फायरिंग मामले में SIT जांच की तैयारी है। पुलिस को गैंगस्टर कनेक्शन और पुरानी रंजिश के संकेत मिले हैं।
पंचकूला में भाजपा पार्षद के देवर रतन लुबाना पर हुई फायरिंग के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस अब इस हाई-प्रोफाइल केस को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंपने की तैयारी कर रही है। वहीं घटना में शामिल दोनों शूटर अभी तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैं क्योंकि वे पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड में रतन लुबाना का भी आपराधिक इतिहास सामने आया है। जानकारी के अनुसार उनके खिलाफ चंडीगढ़ में चार अलग-अलग मामले दर्ज हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक रतन लुबाना के खिलाफ पहला मामला वर्ष 2015 में दर्ज हुआ था। यह मामला लूट और आईटी एक्ट से जुड़ा था। इस केस में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और उन्हें दो साल की सजा भी मिली थी। इसी दौरान उनके खिलाफ मारपीट, रास्ता रोकने और जान से मारने की धमकी देने का एक अन्य मामला भी दर्ज हुआ था।
इसके बाद वर्ष 2017 में भी उनके खिलाफ मारपीट और धमकी से जुड़ा मामला दर्ज हुआ था। हालांकि पुलिस जांच के बाद वह एफआईआर रद्द कर दी गई थी। वर्ष 2022 में उनके खिलाफ आईपीसी 188 के तहत भी मामला दर्ज हुआ था, जिसमें अप्रैल 2023 में गिरफ्तारी हुई थी।
अब रतन लुबाना का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद पुलिस इस पूरे मामले की जांच नए सिरे से कर रही है। पहले जांच का फोकस केवल रंगदारी कॉल और गैंगवार एंगल पर था, लेकिन अब पुरानी रंजिश और निजी दुश्मनी के पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।
घटना के बाद रतन लुबाना के मोबाइल पर एक कॉल भी आई थी। परिवार के सदस्यों ने कॉल रिसीव की। कॉल करने वाले ने खुद को गैंगस्टर रोहित गोदारा बताया और पूछा कि रतन को कितनी गोलियां लगी हैं। परिवार के जवाब पर कॉलर ने कथित तौर पर कहा कि "आज नहीं तो कल उसे मरना ही था।"
परिवार के सूत्रों का यह भी दावा है कि रतन लुबाना को पहले भी रंगदारी मांगने वाली कॉल आ चुकी थीं। हालांकि इन कॉल्स की संख्या, मांग की गई रकम और पुलिस कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
घटना वाले दिन पुलिस को सूचना मिली कि फायरिंग करने वाले बदमाश भाग रहे हैं। मौके पर मौजूद डिटेक्टिव स्टाफ के जवान ने उनका पीछा किया और वायरलेस पर सूचना प्रसारित की। इसके बाद डिटेक्टिव स्टाफ, क्राइम ब्रांच और एंटी नारकोटिक्स सेल की टीमों ने मट्टावाला फ्लाईओवर के पास नाकाबंदी कर दी।
पुलिस के अनुसार नाकाबंदी देखकर बदमाशों ने पुलिस पर भी फायरिंग शुरू कर दी। बेला बिस्टा चौक और नाडा साहिब क्षेत्र में भी पुलिस टीमों को निशाना बनाया गया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें दोनों शूटर घायल हो गए।
मुठभेड़ में घायल बदमाशों की पहचान जसविंद्र सिंह निवासी लुधियाना और हरप्रीत सिंह निवासी होशियारपुर के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि दोनों गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा गैंग से जुड़े हुए हैं।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों ने रतन लुबाना और पुलिस टीमों पर करीब 18 राउंड फायरिंग की। उनके कब्जे से दो सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल भी बरामद की गई हैं, जिनमें 10-10 कारतूस वाली मैगजीन लगी हुई थी।
फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। SIT गठन के बाद इस सनसनीखेज फायरिंग मामले में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
pooja