कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के कमजोर प्रदर्शन की आशंका, नीरज भी गोल्ड के प्रबल दावेदार नहीं
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की इंटरनल रिपोर्ट में भारत को केवल 32 पदक और 7 गोल्ड मिलने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा को भी गोल्ड का प्रबल दावेदार नहीं माना गया है।
इंटरनल रिपोर्ट में भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिर्फ 7 गोल्ड मिलने का अनुमान
रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा को भी गोल्ड का प्रबल दावेदार नहीं माना गया
शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन बाहर होने से 28 साल का सबसे कमजोर प्रदर्शन होने की आशंका
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के सामने पिछले 28 वर्षों का सबसे कमजोर प्रदर्शन करने का खतरा मंडरा रहा है। भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) और विभिन्न स्पोर्ट्स फेडरेशन की इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार, भारत को इस बार पैरा स्पोर्ट्स सहित कुल 13 खेलों में लगभग 32 पदक मिलने का अनुमान है। इनमें केवल 7 गोल्ड मेडल शामिल होने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट की सबसे बड़ी चर्चा ओलिंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा को लेकर है। वर्ष 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता नीरज को इस बार गोल्ड का सबसे बड़ा दावेदार नहीं माना गया है। यह आकलन खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
भारत के कमजोर प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स के खेल कार्यक्रम में बड़े बदलाव को माना जा रहा है। शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेलों को इस बार प्रतियोगिता से बाहर रखा गया है। यही तीनों खेल भारत के लिए वर्षों से सबसे अधिक पदक दिलाने वाले रहे हैं।
ग्लासगो 2026 में बर्मिंघम 2022 के 19 खेलों की तुलना में केवल 10 खेल शामिल किए गए हैं। इसके अलावा टेबल टेनिस, हॉकी, स्क्वैश और क्रिकेट भी इस बार कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं। पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के 61 में से 30 पदक इन्हीं खेलों से आए थे। ऐसे में पदकों की संख्या में गिरावट की आशंका स्वाभाविक मानी जा रही है।
रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा की मौजूदा फॉर्म को भी चुनौतीपूर्ण बताया गया है। जेवलिन थ्रो में उनके सामने पाकिस्तान के अरशद नदीम और ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर जैसे खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा रहने की संभावना है। इसी कारण उन्हें गोल्ड का निश्चित दावेदार नहीं माना गया है।
बॉक्सिंग में भारत की उम्मीदें लवलीना बोरगोहेन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों पर टिकी रहेंगी। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार हाल के समय में उनका प्रदर्शन पहले जैसा प्रभावशाली नहीं रहा है। कई अन्य भारतीय खिलाड़ियों की स्थिति भी ऐसी ही बताई गई है, जिनमें पदक जीतने की क्षमता तो है, लेकिन गोल्ड की गारंटी नहीं मानी जा रही।
इस बार शामिल 10 खेलों में से स्वीमिंग, साइक्लिंग, जूडो, नेटबॉल और जिम्नास्टिक्स ऐसे खेल हैं, जिनमें भारत का रिकॉर्ड पारंपरिक रूप से मजबूत नहीं रहा है। इससे भी कुल पदक तालिका पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
हालांकि भविष्य को लेकर तस्वीर उम्मीद भरी दिखाई दे रही है। अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत करेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार उस समय खेलों की संख्या बढ़ाकर 15 से 17 की जा सकती है। इससे शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे भारत के मजबूत खेलों की वापसी संभव है, जिससे देश के पदकों की संख्या में फिर बढ़ोतरी हो सकती है।
pooja