BJP नेता के भाई पर फायरिंग, SIT की तैयारी
पंचकूला में भाजपा पार्षद के देवर रतन लुबाना पर फायरिंग मामले की जांच SIT को सौंपने की तैयारी है। जांच में लुबाना का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है।
- पंचकूला फायरिंग केस की जांच SIT को सौंपने की तैयारी
- भाजपा पार्षद के देवर रतन लुबाना का आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने
- गोदारा गैंग के दो शूटर एनकाउंटर में घायल, पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
हरियाणा के पंचकूला में भाजपा पार्षद के देवर रतन लुबाना पर हुई फायरिंग के मामले की जांच अब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंपे जाने की तैयारी चल रही है। 4 जून को हुई इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस लगातार मामले की जांच में जुटी हुई है। फायरिंग में शामिल दोनों शूटर पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए थे और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है, जिसके चलते अभी तक उनकी औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
इस बीच जांच के दौरान रतन लुबाना का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार चंडीगढ़ में रतन लुबाना के खिलाफ चार एफआईआर दर्ज हैं। पहला मामला वर्ष 2015 में लूट और आईटी एक्ट से जुड़ा था, जिसमें उनकी गिरफ्तारी हुई थी और उन्हें दो साल की सजा भी हुई थी।
इसी वर्ष उनके खिलाफ मारपीट, रास्ता रोकने और जान से मारने की धमकी देने से जुड़ा एक और मामला दर्ज हुआ था। वर्ष 2017 में भी इसी तरह की धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी, हालांकि बाद में पुलिस जांच में मामला रद्द कर दिया गया था। वर्ष 2022 में उन पर IPC 188 के तहत भी मामला दर्ज हुआ था, जिसमें अप्रैल 2023 में गिरफ्तारी हुई थी।
रतन लुबाना का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कई पहलुओं से कर रही है। शुरुआती जांच में रंगदारी, गैंगवार और दूसरे गैंग को फायदा पहुंचाने जैसे एंगल सामने आए थे, लेकिन अब पुरानी दुश्मनी और व्यक्तिगत रंजिश की दिशा में भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
फायरिंग की घटना के कुछ समय बाद रतन लुबाना के मोबाइल पर एक कॉल आई थी। परिवार के सदस्यों ने यह कॉल रिसीव की। कॉल करने वाले ने खुद को गैंगस्टर रोहित गोदारा बताया और रतन लुबाना के बारे में जानकारी ली। कॉलर ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि "आज नहीं तो कल वह मरेगा"। इस कॉल के बाद पुलिस ने मामले को और गंभीरता से लेना शुरू कर दिया।
परिवार के सूत्रों के अनुसार रतन लुबाना को पहले भी रंगदारी मांगने वाली कॉल्स मिल चुकी थीं। हालांकि इन कॉल्स में कितनी रकम मांगी गई थी और उस समय पुलिस ने क्या कार्रवाई की थी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
पुलिस जांच में सामने आया कि घटना के समय डिटेक्टिव स्टाफ का एक जवान मौके के आसपास मौजूद था। उसने तुरंत शूटरों का पीछा शुरू किया और वायरलेस के जरिए सूचना प्रसारित की। इसके बाद डिटेक्टिव स्टाफ, क्राइम ब्रांच और एंटी नारकोटिक्स सेल की टीमें सक्रिय हो गईं और मट्टावाला फ्लाईओवर के पास नाकाबंदी कर दी गई।
नाकाबंदी देखकर बदमाशों ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने बेला बिस्टा चौक और नाडा साहिब क्षेत्र में पीछा कर रही पुलिस गाड़ी पर गोलियां चलाईं। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें दोनों बदमाशों के पैरों में गोलियां लगीं।
घायल शूटरों को पहले पंचकूला के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अधिक रक्तस्राव होने के कारण उन्हें बाद में चंडीगढ़ PGI रेफर कर दिया गया। पुलिस ने दोनों की पहचान जसविंद्र सिंह निवासी लुधियाना और हरप्रीत निवासी होशियारपुर के रूप में की है। दोनों को गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा गैंग से जुड़ा बताया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक दोनों शूटरों ने रतन लुबाना और पुलिस टीम पर करीब 18 राउंड फायरिंग की थी। आरोपियों के कब्जे से दो सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद की गई हैं, जिनमें 10-10 कारतूस क्षमता वाली मैगजीन लगी हुई थी। पुलिस अब पूरे नेटवर्क, फंडिंग और साजिश की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
Akhil Mahajan