हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में बड़ी कार्रवाई: PHD छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप में दो असिस्टेंट प्रोफेसर सस्पेंड

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में PHD छात्रा से छेड़छाड़ की शिकायत के बाद दो असिस्टेंट प्रोफेसरों को सस्पेंड किया गया है। मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय ने कमेटी गठित की है।

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में बड़ी कार्रवाई: PHD छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप में दो असिस्टेंट प्रोफेसर सस्पेंड

➤ HAU की PHD छात्रा की शिकायत पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तुरंत की कार्रवाई

➤ बायोटेक्नोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अजीव सांगवान और नवीन कौशिक निलंबित

➤ निष्पक्ष जांच के लिए विश्वविद्यालय ने गठित की आंतरिक जांच समिति


हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) में छात्रा सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की एक पीएचडी छात्रा द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत के बाद प्रशासन ने दो असिस्टेंट प्रोफेसरों को सस्पेंड कर दिया है। आरोपित प्रोफेसरों की पहचान अजीव सांगवान और नवीन कौशिक के रूप में हुई है।

जानकारी के अनुसार पीएचडी छात्रा ने डीन ऑफ कॉलेज को लिखित शिकायत सौंपते हुए दोनों असिस्टेंट प्रोफेसरों पर अनुचित व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। शिकायत मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि शिकायत प्राप्त होते ही यह स्पष्ट किया गया कि जांच पूरी होने तक आरोपी प्रोफेसर शैक्षणिक या प्रशासनिक गतिविधियों में शामिल नहीं रहेंगे, ताकि किसी भी प्रकार का दबाव या प्रभाव जांच प्रक्रिया पर न पड़े। साथ ही मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन कर दिया गया है।

प्रशासन के अनुसार जांच समिति कई अहम बिंदुओं पर काम करेगी। इसमें यह जांच शामिल होगी कि शिकायत में बताए गए समय और स्थान पर छात्रा और दोनों प्रोफेसर मौजूद थे या नहीं। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, अटेंडेंस रजिस्टर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि क्या प्रोफेसरों ने छात्रा के शोध कार्य या पीएचडी थीसिस को लेकर उसे डराने, दबाव बनाने या किसी प्रकार की धमकी देने की कोशिश की थी।

जांच समिति विभाग के अन्य छात्रों, लैब सहायकों और सहकर्मियों से भी पूछताछ करेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या पूर्व में भी किसी छात्र या छात्रा के साथ इस तरह का व्यवहार हुआ था। इसके साथ ही व्हाट्सएप, ईमेल या कॉल के जरिए हुई किसी भी संदिग्ध बातचीत की भी जांच की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि क्या प्रोफेसरों ने अपनी शैक्षणिक स्थिति का दुरुपयोग किया।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार और सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।