"आज रिटायरमेंट, और साहब फरार! 657 करोड़ के घोटाले में CBI से छिपते फिर रहे IAS प्रदीप कुमार"
हरियाणा के पूर्व IAS प्रदीप कुमार रिटायरमेंट के दिन CBI जांच के बीच सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए। HSPCB फंड मामले में अग्रिम जमानत याचिका पर 2 जुलाई को अदालत फैसला सुनाएगी।
➤ रिटायरमेंट के दिन लापता बताए जा रहे IAS प्रदीप कुमार, CBI कर रही तलाश
➤ HSPCB फंड ट्रांसफर और कथित बैंक घोटाले की जांच के घेरे में अधिकारी
➤ अग्रिम जमानत याचिका पर 2 जुलाई को आएगा अदालत का फैसला
जो दिन फूलों के गुलदस्ते, प्रशस्ति पत्रों और शानदार विदाई समारोह के नाम होना चाहिए था, वह सीबीआई (CBI) की रेड और खौफ के साए में बीत रहा है। हरियाणा के इतिहास में पहली बार किसी आईएएस अधिकारी की रिटायरमेंट कुछ इस तरह हो रही है, जहां जश्न की जगह सन्नाटा है और अधिकारी खुद अंडरग्राउंड हैं।
आज 30 जून 2026 है। एक आम सरकारी अधिकारी के लिए यह दिन उसके जीवन के सबसे भावुक और सम्मानजनक दिनों में से एक होता है—उसका रिटायरमेंट का दिन। दशकों तक राज्य की सेवा करने के बाद जब एक आईएएस (IAS) अधिकारी अपने कार्यालय से विदा लेता है, तो विभाग शानदार विदाई पार्टी का आयोजन करता है। लेकिन, हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार (प्रदीप डागर) के लिए कहानी एकदम उलट है।
वे अपने रिटायरमेंट के दिन किसी कार्यालय में नहीं, बल्कि अज्ञात जगह पर छुपे हुए हैं। उनका मोबाइल फोन बंद है, उनके सरकारी आवास पर ताला है और पीछे लगी है देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी—सीबीआई।
आखिर एक वरिष्ठ अधिकारी को अपनी ही विदाई के दिन इस तरह क्यों भागना पड़ रहा है? आइए इस पूरे मामले की परतें खोलते हैं।
600 करोड़ का वह महाघोटाला, जिसने नींद उड़ा दी
प्रदीप कुमार का यह खौफ बेवजह नहीं है। यह पूरा मामला हरियाणा के बहुचर्चित IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले से जुड़ा है, जो लगभग 593 से 657 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।
प्रदीप कुमार अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (HSPCB) के मेंबर सेक्रेटरी (सदस्य सचिव) रहे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान वित्त विभाग के नियमों को ताक पर रखकर HSPCB के फंड के करीब 169 करोड़ रुपये निजी बैंकों में ट्रांसफर किए गए और वहां से फर्जी (शेल) कंपनियों के जरिए यह पैसा निकाल लिया गया। सरकारी खजाने को लगे इस भारी चूने के मामले में जब राज्य सतर्कता ब्यूरो (Vigilance) से जांच सीबीआई के हाथ में गई, तो ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मच गया।
दो IAS पहले ही जा चुके हैं जेल, इसलिए सता रहा है डर
प्रदीप कुमार के अचानक 'गायब' होने के पीछे की सबसे बड़ी वजह हाल ही में हुई कुछ हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां हैं। सीबीआई इस मामले में अब तक कोई रियायत देने के मूड में नहीं है। पिछले कुछ ही दिनों में सीबीआई ने हरियाणा के दो दिग्गज आईएएस अधिकारियों राम कुमार सिंह (आरके सिंह): पूर्व नगर निगम कमिश्नर, पंचकूला और पंकज अग्रवाल: वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, जिन्हें उनके आवास के पास से गिरफ्तार किया गया।
इनके अलावा एक वरिष्ठ आईएफएस (IFoS) अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव भी सलाखों के पीछे हैं। जब प्रदीप कुमार ने देखा कि उनके साथी अधिकारी एक-एक कर गिरफ्तार हो रहे हैं, तो 8 अप्रैल को सस्पेंड हो चुके प्रदीप कुमार रिटायरमेंट से ठीक चार दिन पहले अपना फोन स्विच ऑफ करके अज्ञात जगह चले गए।
अदालत में बीमारी की गुहार और आखिरी दांव
सीबीआई की हथकड़ियों से बचने के लिए प्रदीप कुमार ने अपना आखिरी कानूनी दांव चला है। उन्होंने पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है।
अपनी याचिका में उन्होंने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा है कि अन्य आरोपियों से उनका कोई सीधा संपर्क नहीं था। एक मानवीय पहलू को सामने रखते हुए उन्होंने अदालत को अपनी गिरती सेहत का भी हवाला दिया है। याचिका में कहा गया है कि वे हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज (मधुमेह) के मरीज हैं और हिरासत में पूछताछ से उनकी जान को खतरा हो सकता है।
इस मामले में अदालत 2 जुलाई को अपना फैसला सुनाएगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या उन्हें रिटायरमेंट के बाद सुकून भरी जिंदगी मिलेगी या फिर उनके बाकी साथियों की तरह उनकी रातें भी जेल की बैरक में कटेंगी।
रिटायरमेंट के बाद क्या?
एक सवाल जो सबके मन में है—क्या रिटायरमेंट के बाद प्रदीप कुमार बच जाएंगे? कानून के जानकारों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में रिटायरमेंट कोई सुरक्षा कवच नहीं होता। भले ही आज वे आधिकारिक तौर पर सरकारी सेवा से मुक्त हो रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई, जांच और जवाबदेही उसी तरह जारी रहेगी। अगर दोष साबित होता है, तो उनकी पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स (सेवानिवृत्ति लाभ) भी रोके जा सकते हैं।
हरियाणा की अफसरशाही के लिए 30 जून 2026 का यह दिन एक कड़वे सबक के रूप में याद रखा जाएगा। लाल बत्ती की गाड़ी और रसूखदार कुर्सी से शुरू हुआ सफर, रिटायरमेंट के दिन लुका-छिपी के खेल में तब्दील हो जाएगा, यह शायद ही किसी ने सोचा होगा।
(नोट: यह रिपोर्ट वर्तमान में उपलब्ध समाचारों और सीबीआई जांच के सार्वजनिक तथ्यों पर आधारित है। मामला अभी अदालत के विचाराधीन है।)
Akhil Mahajan