अब मोतियाबिंद से घुटना-कूल्हा रिप्लेसमेंट तक मुफ्त सरकारी अस्पताल में!

हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने 16 मेडिकल-सर्जिकल पैकेज केवल सूचीबद्ध सरकारी अस्पतालों तक सीमित करने का फैसला किया है। फेको-IOL, हिप-नी रिप्लेसमेंट, हर्निया सर्जरी समेत कई प्रमुख ऑपरेशन अब सरकारी संस्थानों में कराए जाएंगे, ताकि आयुष्मान भारत व चिरायु योजना के तहत पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण मुफ्त इलाज सुनिश्चित हो सके।

अब मोतियाबिंद से घुटना-कूल्हा रिप्लेसमेंट तक मुफ्त सरकारी अस्पताल में!

16 मेडिकल-सर्जिकल पैकेज अब केवल सरकारी अस्पतालों में
आयुष्मान भारतचिरायु योजना के तहत सरकारी भागीदारी बढ़ेगी
फेको इमल्सिफिकेशन, टोटल नी/हिप रिप्लेसमेंट जैसे प्रमुख ऑपरेशन सरकारी सूची में


फरीदाबाद। हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के स्वास्थ्य परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव करते हुए इलाज और ऑपरेशन से जुड़े कुल 16 मेडिकल-सर्जिकल पैकेज को केवल सूचीबद्ध सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों तक सीमित करने का फैसला किया है। इस निर्णय का उद्देश्य आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों की भूमिका मजबूत करना, पैकेजों के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण लाना तथा रोगियों को पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना बताया गया है।

फरीदाबाद नागरिक अस्पताल के CMO डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि सरकार ने ऐसे 5 मेडिकल-सर्जिकल सेवाओं को निजी अस्पतालों से हटा कर केवल सरकारी सूचीबद्ध केंद्रों तक सीमित किया है जिनमें फेको-इमल्सिफिकेशन IOL (मोतियाबिंद सर्जरी), एब्डोमिनल हिस्टेरेक्टॉमी, सीओपीडी के तीव्र प्रकोप का उपचार, गंभीर निर्जलीकरण के साथ तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस और बिना CBD एक्सप्लोरेशन के लेप्रोस्कोपिक कोलीसिस्टेक्टॉमी शामिल हैं। साथ ही 11 सर्जिकल, ऑर्थोपेडिक व ENT पैकेजों को भी केवल सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित किया गया है, जिनमें टोटल नी व हिप रिप्लेसमेंट (प्राइमरी व रिवीजन), टिम्पेनोप्लास्टी, हर्निया सर्जरी (ओपन व लैप्रोस्कोपिक), अपेंडेक्टोमी, एडेनॉइडेक्टोमी, टॉन्सिलेक्टोमी, हैमोरॉयडेक्टॉमी, हाइड्रोसील ऑपरेशन और सर्कमसिजन प्रमुख हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि यह कदम सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेगा और ग्रामीण व सीमांत इलाकों में रहने वाले लाभार्थियों को निःशुल्क तथा मानक के अनुरूप इलाज मिल सकेगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मरीजों के इलाज पर इसका असर पड़ेगा, उनके लिए राज्य-स्तरीय समन्वय कर के परिवहन, बेड उपलब्धता व आवश्यक चिकित्सीय तैयारी सुनिश्चित की जाएगी ताकि मरीजों को असुविधा न हो। अधिकारीयों के अनुसार, जिन प्राइवेट संस्थानों में पहले ये पैकेज चल रहे थे, उनसे भी सहकारिता की अपेक्षा की जा रही है ताकि संक्रमण-काल और ट्रांज़िशन के समय मरीजों को किसी तरह की चिकित्सा रोक न झेलनी पड़े।

स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का निर्देश कोरोना-काल के बाद से बढ़े हुए निजी खर्च और पैकेज-बेस्ड ओवरचार्जिंग को नियंत्रित करने का एक बड़ा प्रयास है, मगर उसे लागू करने में चुनौती सरकारी अस्पतालों की क्षमता, विशेषज्ञ स्टाफ और ऑपरेटिंग थियेटर की उपलब्धता को बढ़ाना होगा ताकि ऑपरेशन के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची न बनें और आपातकालीन सेवाओं पर असर न पड़े। विभाग ने बताया कि जल्द ही सूचीबद्ध सरकारी संस्थानों की सूची और क्रियान्वयन समयरेखा सार्वजनिक की जाएगी और योजनाओं के तहत इलाज कर रहे मरीजों को आवश्यक गाइडलाइन भेजी जाएंगी।

यह निर्णय राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आयुष्मान कार्डधारक, चिरायु लाभार्थी तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को बड़ी सर्जरी के लिए निजी खर्च झेलने की आवश्यकता कम होगी और सरकारी अस्पतालों की क्षमताओं में सुधार पर बल दिया जाएगा।