हरियाणा कांग्रेस में बगावत पर सख्ती, क्रॉस वोटिंग वाले विधायकों से इस्तीफे की मांग

हरियाणा कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग पर विवाद गहराया, विधायकों से इस्तीफे की मांग, 3 अप्रैल को अनुशासन समिति की बैठक में कार्रवाई संभव।

हरियाणा कांग्रेस में बगावत पर सख्ती, क्रॉस वोटिंग वाले विधायकों से इस्तीफे की मांग

क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों पर सख्त एक्शन तय
प्रदेश अध्यक्ष ने बागी MLAs से मांगा इस्तीफा
अनुशासन समिति की बैठक 3 अप्रैल को चंडीगढ़ में होगी


हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में उठे क्रॉस वोटिंग विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में आज कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक हुई, जिसमें पार्टी के भीतर चल रहे मतभेद खुलकर सामने आए।

बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने की। इस दौरान क्रॉस वोटिंग करने के आरोप में घिरे 5 विधायकों को बैठक में नहीं बुलाया गया। वहीं, विनेश फोगाट और विधायक पूजा चौधरी भी इस बैठक से नदारद रहीं, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

बैठक के बाद हुड्डा ने स्पष्ट किया कि क्रॉस वोटिंग का मामला बेहद गंभीर है और पार्टी इस पर कड़ा रुख अपनाने जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर 3 अप्रैल को चंडीगढ़ में कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति की बैठक बुलाई गई है। हुड्डा ने कहा कि “सब कुछ तय हो चुका है और दोषियों पर कार्रवाई निश्चित है।”

दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने और भी सख्त रुख अपनाते हुए क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों से सीधे इस्तीफे की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि जिन विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ वोट किया, उन्हें नैतिकता के आधार पर पद छोड़ देना चाहिए।

इस बैठक में कुल 30 विधायक शामिल हुए, हालांकि उम्मीद जताई जा रही थी कि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद रहेंगे, लेकिन दोनों नेता इसमें शामिल नहीं हुए। बैठक के बाद पार्टी के प्रभारी बीके हरि प्रसाद और हुड्डा ने स्पष्ट किया कि क्रॉस वोटिंग के आरोप बेबुनियाद नहीं हैं।

वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस विधायकों को दो गुटों में बांट दिया है। एक गुट क्रॉस वोटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता है, जबकि दूसरा गुट मांग कर रहा है कि जिन विधायकों के वोट रद्द हुए, उनके नाम भी सार्वजनिक किए जाएं।

इस मामले में पार्टी की अनुशासन समिति ने पांच विधायकों को नोटिस जारी किया था, जिसमें से तीन विधायकों ने जवाब दे दिया है। नारायणगढ़ से शैली चौधरी, साढ़ौरा से रेनू बाला और रतिया से जरनैल सिंह ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी लाइन के अनुसार ही वोट किया। हालांकि, पार्टी उनके जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आ रही है।

दूसरी तरफ, पुन्हाना के विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन के विधायक मोहम्मद इसराइल ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है, जिससे उनके खिलाफ बगावत के संकेत मिल रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में इस समय इस्तीफों और संभावित उपचुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं। खासकर शैली चौधरी और मोहम्मद इलियास के इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही हैं। अगर ऐसा होता है, तो इन सीटों पर उपचुनाव हो सकते हैं, जहां कांग्रेस नए चेहरों को मौका दे सकती है, जबकि भाजपा भी इन सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।

इस बीच, अनुशासन समिति ने अपनी रिपोर्ट 28 मार्च को दिल्ली हाईकमान को सौंप दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि जिन विधायकों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया, उन्होंने गंभीर अनुशासनहीनता की है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

यदि पार्टी इन विधायकों को निष्कासित करती है, तो उनके पास सीमित विकल्प बचेंगे। वे निर्दलीय के रूप में काम कर सकते हैं या किसी अन्य दल में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, दल-बदल कानून के चलते उनकी सदस्यता भी खतरे में पड़ सकती है, जिससे उनका राजनीतिक भविष्य दांव पर लग सकता है।