जंतर-मंतर CJP आंदोलन पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का बड़ा दावा, बोलीं- ‘आतंकी भी शामिल’.

हरियाणा BJP अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने CJP आंदोलन में आतंकियों की मौजूदगी और महिला कॉन्स्टेबल की मौत का दावा किया, जिसे दिल्ली पुलिस पहले गलत बता चुकी है।

जंतर-मंतर CJP आंदोलन पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का बड़ा दावा, बोलीं- ‘आतंकी भी शामिल’.

अर्चना गुप्ता ने हांसी में CJP आंदोलन में अराजकता और आतंकियों के शामिल होने का दावा किया

महिला कॉन्स्टेबल की मौत के दावे को दिल्ली पुलिस 24 जुलाई को गलत बता चुकी है

CJP और कांग्रेस ने BJP प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर सवाल उठाए, तथ्यों की जांच की मांग


हांसी। जंतर-मंतर पर हुए CJP आंदोलन को लेकर हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने शनिवार को हांसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आंदोलन को लेकर दो बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान अराजकता और आतंकवादी दिखाई दिए। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दौरान एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत हुई और एक पुलिस अधिकारी की आंख चली गई। हालांकि, महिला हेड कॉन्स्टेबल की मौत से जुड़ा दावा दिल्ली पुलिस पहले ही गलत बता चुकी है। 24 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल इस दावे को फर्जी बताते हुए कहा था कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान ऐसी कोई घटना नहीं हुई।

डॉ. अर्चना गुप्ता ने ये बयान शनिवार को हांसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए। इस दौरान उनके साथ कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा और हांसी विधायक विनोद भयाना भी मौजूद थे। डॉ. अर्चना गुप्ता मई 2026 में हरियाणा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त की गई थीं।

आंदोलन को लेकर इससे पहले भी विदेशी फंडिंग और बाहरी ताकतों की भूमिका के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आ चुका है। विदेश मंत्रालय की ओर से 25 जुलाई को कहा गया था कि उस समय उसके पास CJP आंदोलन में विदेशी फंडिंग को लेकर साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं थी। बाद में मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके बयान को सोशल मीडिया पर ‘विदेशी फंडिंग नहीं होने की क्लीन चिट’ के तौर पर पेश करना भ्रामक था।

अर्चना गुप्ता ने आंदोलन को लेकर क्या-क्या दावा किया

डॉ. अर्चना गुप्ता ने अपने बयान में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर अराजकता और आतंकवादी गतिविधियों का दावा किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत और एक पुलिस अधिकारी की आंख जाने की बात भी कही।

हालांकि, महिला पुलिसकर्मी की मौत को लेकर सामने आए दावे की स्थिति अलग है। दिल्ली पुलिस ने 24 जुलाई को स्पष्ट किया था कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला हेड कॉन्स्टेबल की मौत नहीं हुई थी। पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीर और उससे जुड़े दावे को फर्जी बताया था तथा ऐसी सामग्री को लेकर कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।

ऐसे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के इस दावे ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। एक तरफ BJP की ओर से आंदोलन की गतिविधियों और उसमें कथित बाहरी तत्वों की मौजूदगी पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ आंदोलन से जुड़े लोग और विपक्ष इन दावों को लेकर भाजपा से तथ्य और प्रमाण मांग रहे हैं।

CJP की ओर से सुधीर सांगवान ने किया पलटवार

CJP की कोर कमेटी के सदस्य सुधीर सांगवान ने वीडियो जारी कर अर्चना गुप्ता के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान को शर्मनाक बताया और कहा कि भाजपा नेताओं को सही जानकारी के साथ बात करनी चाहिए।

सुधीर सांगवान ने विदेशी फंडिंग के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि गृह मंत्रालय की जानकारी और विदेश मंत्रालय के बयानों को सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने पुलिसकर्मी की मौत के दावे पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इस जानकारी का आधार क्या है।

उन्होंने आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि युवाओं की मांगों को स्वीकार किया जाना इस बात का संकेत है कि आंदोलन की मांगों को गंभीरता से लिया गया।

CJP आंदोलन को लेकर विदेशी फंडिंग के आरोप पहले भी राजनीतिक विवाद का विषय रहे हैं। 23 जुलाई को विदेशी फंडिंग की जांच की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई की खबर सामने आई थी, जबकि बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने NIA जांच की मांग वाली PIL को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि NIA को जांच सौंपने का निर्णय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

कांग्रेस ने भी BJP प्रदेश अध्यक्ष को घेरा

हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने भी अर्चना गुप्ता के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने से पहले तथ्यों की जांच की जानी चाहिए।

राव नरेंद्र सिंह ने आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों के होने के दावे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इसके लिए क्या प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को देशद्रोह और आतंकवाद से जोड़ने से पहले तथ्यों को सामने रखा जाना चाहिए।

उन्होंने आंदोलन में मिलने वाले खाने को लेकर उठाए गए सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे युवाओं की बुनियादी जरूरतों पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

विदेशी फंडिंग के आरोप पर पहले भी हो चुका है विवाद

CJP आंदोलन के दौरान विदेशी फंडिंग को लेकर BJP और विपक्ष के बीच पहले भी तीखी बयानबाजी हुई थी। भाजपा की ओर से कुछ नेताओं ने आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों और फंडिंग के आरोप लगाए थे। दूसरी तरफ, विदेश मंत्रालय ने 25 जुलाई को कहा था कि उसके पास उस समय इस संबंध में साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं थी।

इसके बाद विदेश मंत्रालय ने वायरल सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि उसके प्रवक्ता के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। मंत्रालय का आधिकारिक जवाब यह था कि उस समय इस मामले पर साझा करने के लिए कोई जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसे विदेशी फंडिंग से संबंधित किसी अंतिम निष्कर्ष या क्लीन चिट के तौर पर पेश करना सही नहीं था।

महिला कॉन्स्टेबल की मौत का दावा क्यों महत्वपूर्ण

अर्चना गुप्ता के बयान में महिला कॉन्स्टेबल की मौत का दावा सबसे ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि इसी तरह का दावा जुलाई में सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था। उस समय दिल्ली पुलिस ने खुद इस दावे का खंडन किया था

24 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने कहा था कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला हेड कॉन्स्टेबल की मौत नहीं हुई। पुलिस ने वायरल तस्वीर को फर्जी बताते हुए लोगों से बिना पुष्टि वाली जानकारी पर भरोसा नहीं करने की अपील की थी।

इसलिए अर्चना गुप्ता के ताजा बयान में इस दावे के दोबारा सामने आने से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब सवाल यही है कि इस दावे के पीछे उनके पास कौन से तथ्य या स्रोत हैं।

आंदोलन पर सियासत अभी थमी नहीं

जंतर-मंतर पर CJP से जुड़ा आंदोलन पहले ही देश की राजनीति में चर्चा का विषय बन चुका है। आंदोलन के दौरान विदेशी फंडिंग, बाहरी ताकतों की भूमिका, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर लगातार राजनीतिक बयान सामने आते रहे।

अब हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के ताजा बयान के बाद यह विवाद फिर हरियाणा की राजनीति में पहुंच गया है। BJP की ओर से आंदोलन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि CJP और कांग्रेस ने इन दावों के आधार पर सवाल उठाए हैं।

खास तौर पर महिला कॉन्स्टेबल की मौत वाले दावे को लेकर दिल्ली पुलिस का 24 जुलाई का खंडन पहले से सार्वजनिक रिकॉर्ड में मौजूद है। ऐसे में इस पूरे मामले में दावे और आधिकारिक पुष्टि के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।