BJP ने सपा-कांग्रेस को विक्रम- बेताल बताया, अखिलेश की रथ यात्रा पर ली चुटकी

खिलेश यादव की रायबरेली पीडीए रथ यात्रा के बीच बीजेपी ने सपा-कांग्रेस रिश्तों पर सवाल उठाए और दोनों दलों की तुलना विक्रम-बेताल से की।

BJP  ने सपा-कांग्रेस को  विक्रम- बेताल बताया, अखिलेश की रथ यात्रा पर ली चुटकी

➤ बीजेपी ने सपा-कांग्रेस के रिश्तों पर उठाए सवाल, विक्रम-बेताल से की तुलना
➤ अखिलेश यादव की रायबरेली पीडीए रथ यात्रा पर बीजेपी नेताओं ने साधा निशाना
➤ सपा-कांग्रेस ने आरोपों पर क्या कहा, अब गठबंधन की स्थिति पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा


लखनऊ/रायबरेली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राजनीतिक दौरों और बयानों का सिलसिला तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को रायबरेली से अपनी पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत की। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि दोनों दलों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि, गठबंधन की वास्तविक स्थिति को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आ रहे हैं।

बीजेपी नेता और प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर निशाना साधते हुए दोनों दलों की स्थिति की तुलना विक्रम-बेताल से की। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अब कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्र में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता पूरे घटनाक्रम को देख रही है और उनके मुताबिक सपा की इस राजनीतिक कवायद का फायदा बीजेपी और एनडीए को मिल सकता है। उन्होंने सपा और कांग्रेस के बारे में यह भी दावा किया कि दोनों दल तेजी से समाप्तवाद की तरफ बढ़ रहे हैं।

अखिलेश यादव की पीडीए रथ यात्रा के लिए रायबरेली को चुना जाना भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। रायबरेली कांग्रेस के प्रभाव वाले प्रमुख क्षेत्रों में रहा है और अखिलेश यादव ने यहीं से अपनी यात्रा की शुरुआत की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, सपा ने इस यात्रा को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों और अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को मजबूत करने के अभियान के रूप में आगे बढ़ाया है।

रायबरेली पहुंचने के दौरान अखिलेश यादव की यात्रा में बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता और समर्थक नजर आए। रिपोर्टों के अनुसार, उनके काफिले में बड़ी संख्या में वाहन शामिल थे और कार्यकर्ताओं की भीड़ के कारण लखनऊ-रायबरेली मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। इस दौरान राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह का काफिला भी जाम में फंस गया था।

बीजेपी की ओर से कांग्रेस-सपा संबंधों पर सवाल उठाए जाने के बीच कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। दिनेश प्रताप सिंह के मुताबिक, जब समाजवादी पार्टी की रथ यात्रा रायबरेली पहुंची तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह सैफई से अपनी यात्रा शुरू करेंगे। बीजेपी नेता ने इसी घटनाक्रम को सपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान के संकेत के रूप में पेश किया।

दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी से गठबंधन की मौजूदा स्थिति के बारे में स्पष्ट रूप से बताने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे कितने भी गठबंधन बनाए जाएं, बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मुकाबला नहीं किया जा सकता। यह उनका राजनीतिक दावा है और इसे बीजेपी के पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए।

इस बीच बीजेपी सांसद रवि किशन ने भी अखिलेश यादव की यात्रा को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रथ कहीं से भी निकले, उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव कांग्रेस के बचे-खुचे वोट बैंक में भी सेंध लगा रहे हैं और इसी वजह से राहुल गांधी भी बेचैन हो गए हैं। रवि किशन ने कहा कि बीजेपी का फोकस पूर्वांचल की सभी सीटों पर जीत हासिल करने और जहां पार्टी कमजोर है, वहां ज्यादा मेहनत करने पर है। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव का रथ कहीं भी जाए, यहां तक कि पाकिस्तान तक चला जाए, तब भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू की ओर से भी सपा और कांग्रेस पर निशाना साधा गया। जेडीयू प्रवक्ता कुंवर अजय सिंह ने अखिलेश यादव की रथ यात्रा में जुटी भीड़ को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव जिस भीड़ की बात कर रहे हैं, वह भीड़ नहीं बल्कि गुंडों और माफियाओं की फौज है। यह बयान जेडीयू प्रवक्ता का आरोप है, जिसे स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

कुंवर अजय सिंह ने PDA को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने PDA को परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाकर रख दिया है और इसमें पिछड़ा, दलित तथा अल्पसंख्यक वर्ग के हितों का प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने दावा किया कि PDA के नाम पर प्रदेश की जनता को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

जेडीयू प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी ने MY समीकरण भी छीन लिया है और मुस्लिम समाज जेडीयू के साथ आ गया है। उन्होंने कहा कि महिला और युवाओं के साथ मिलकर जेडीयू उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण सीटें जीतेगी और एनडीए सरकार बनाएगा। यह जेडीयू नेता का चुनावी दावा है, न कि स्थापित चुनाव परिणाम।

दूसरी ओर, अखिलेश यादव ने रायबरेली में अपनी यात्रा के दौरान PDA को केंद्र में रखते हुए राजनीतिक संदेश दिया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि पीडीए के लोग आरक्षण, संस्कृति और हिंदुस्तानियों के लिए खड़े हैं। उन्होंने लोधी और पासी विधायकों के अपमान का मुद्दा भी उठाया और कहा कि उनकी पार्टी अपने लोगों का अपमान नहीं होने देगी।

अखिलेश यादव की रायबरेली यात्रा को लेकर सपा की ओर से इसे संगठन को सक्रिय करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं बीजेपी और उसके सहयोगी दल इस यात्रा को सपा-कांग्रेस संबंधों और विपक्षी गठबंधन की राजनीति से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में रायबरेली से शुरू हुई यह यात्रा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में बयानबाजी और राजनीतिक दावों का एक प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है।