MG रोड रियल एस्टेट घोटाले में FIR दर्ज, प्रॉपर्टी डीलर और लैंड ओनर्स नामजद , EOW को सौंपी

गुरुग्राम के MG रोड स्थित कमर्शियल प्रोजेक्ट में निवेश घोटाले का मामला सामने आया। प्रॉपर्टी डीलर और लैंड ओनर्स पर धोखाधड़ी की FIR दर्ज, EOW कर रही जांच।

MG रोड रियल एस्टेट घोटाले में FIR दर्ज, प्रॉपर्टी डीलर और लैंड ओनर्स नामजद ,  EOW को सौंपी
  • गुरुग्राम के MG रोड प्रोजेक्ट से जुड़ा रियल एस्टेट निवेश घोटाला
  • प्रॉपर्टी डीलर और दो लैंड ओनर्स पर FIR दर्ज
  • आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी गई जांच


हरियाणा के गुरुग्राम में MG रोड स्थित एक कमर्शियल प्रोजेक्ट से जुड़े कथित रियल एस्टेट निवेश फ्रॉड मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है। यह मामला सेक्टर-14 थाना में दर्ज किया गया है और इसकी जांच अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW-2), गुरुग्राम को सौंपी गई है।

FIR संख्या 0016, दिनांक 19 जनवरी 2026, भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-B के तहत दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता भक्त मोहन पुन, डायरेक्टर Pun Undertakings Network Private Limited, ने आरोप लगाया है कि उन्हें कमर्शियल प्रोजेक्ट में निवेश के नाम पर धोखा दिया गया।

FIR के अनुसार, वर्ष 2017 में शिकायतकर्ता को MG रोड, गुरुग्राम स्थित एक कमर्शियल बिल्डिंग प्रोजेक्ट में निवेश का प्रस्ताव दिया गया। इस संबंध में प्रॉपर्टी डीलर लोकेश भारद्वाज के माध्यम से अतुल मारवाह से मुलाकात कराई गई। बैठकों के दौरान प्रोजेक्ट, संभावित रिटर्न और स्वामित्व हिस्सेदारी को लेकर आश्वासन दिए गए।

FIR में दर्ज है कि 3 जनवरी 2018 को शिकायतकर्ता, लैंड ओनर्स और डेवलपर Kailash Nath Developers Private Limited के बीच एक समझौता हुआ। इस समझौते के तहत शिकायतकर्ता को कमर्शियल प्रोजेक्ट में 25 प्रतिशत अविभाजित हिस्सेदारी एक एसोसिएट डेवलपर के रूप में दी जानी थी। यह एग्रीमेंट नई दिल्ली स्थित डेवलपर के कार्यालय में निष्पादित हुआ।

शिकायतकर्ता के अनुसार, निर्माण कार्य के लिए उसने डेवलपर कंपनी के खाते में धनराशि ट्रांसफर की, लेकिन इसके बावजूद उसकी 25 प्रतिशत हिस्सेदारी न तो ट्रांसफर की गई और न ही आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई। FIR में यह भी आरोप है कि एग्रीमेंट से जुड़े एनेक्सचर और दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए और न ही शिकायतकर्ता के पक्ष में पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई गई।

FIR में आगे कहा गया है कि कमर्शियल बिल्डिंग को लीज पर दे दिया गया, लेकिन इसमें शिकायतकर्ता की हिस्सेदारी का कोई खुलासा नहीं किया गया। इसके अलावा, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और अन्य लेन-देन भी शिकायतकर्ता के कथित 25 प्रतिशत स्वामित्व को नजरअंदाज कर किए गए।

पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी आपसी मिलीभगत से काम कर रहे थे और यह मामला धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश से जुड़ा हुआ है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर FIR दर्ज कर मामले की जांच EOW-2 गुरुग्राम को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है